
उदित वाणी, जमशेदपुर : टाटानगर रेलवे स्टेशन स्थित ऑटो स्टैंड पर पार्किंग शुल्क में अचानक की गई भारी बढ़ोतरी ने शहर के सैकड़ों ऑटो चालकों की आर्थिक स्थिति को झकझोर कर रख दिया है. पहले जहां प्रति ऑटो ₹18 शुल्क लिया जाता था, वहीं अब यह राशि सीधे ₹36 कर दी गई है. इस दोहरी दर की मार झेल रहे चालकों ने शुक्रवार को पोटका के विधायक संजीव सरदार से मिलकर अपनी पीड़ा साझा की.
ऑटो चालकों और मालिकों का कहना है कि रेलवे द्वारा निर्धारित यह नई दर न केवल तर्कहीन है, बल्कि पहले से ही महंगाई और ईंधन दरों की मार झेल रहे उनके जीवनयापन को और भी कठिन बना रही है. चालकों का प्रतिनिधिमंडल विधायक से मिलने पहुंचा और इस शुल्क वृद्धि को जल्द से जल्द वापस लेने की मांग की.
विधायक संजीव सरदार ने लिया मामला संज्ञान में
ऑटो चालकों की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पोटका विधायक संजीव सरदार ने त्वरित पहल करते हुए दक्षिण पूर्व रेलवे के टाटानगर मंडल रेल प्रबंधक तरुण हुरिया, एरिया मैनेजर अभिषेक सिंघल और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ स्टेशन परिसर में एक उच्च स्तरीय बैठक की.
बैठक के दौरान विधायक सरदार ने स्पष्ट रूप से अधिकारियों को बताया कि यह शुल्क वृद्धि आम जनता और निम्न आयवर्ग के ऑटो चालकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रही है, जो स्वीकार्य नहीं है. उन्होंने कहा, “यह शुल्क वृद्धि अनुचित है. ऑटो चालकों की आमदनी पहले ही सीमित है, ऐसे में दोगुना शुल्क देना उनके लिए असंभव हो जाएगा. रेलवे को इस विषय में मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए.”
डीआरएम ने दिया सकारात्मक आश्वासन
विधायक द्वारा उठाए गए मुद्दों पर मंडल रेल प्रबंधक तरुण हुरिया ने सकारात्मक रुख दिखाया और आश्वासन दिया कि पार्किंग शुल्क के मसले पर पुनर्विचार किया जाएगा. डीआरएम ने कहा कि रेलवे इस विषय को गंभीरता से ले रहा है और इस पर जल्द निर्णय लिया जाएगा, जिससे स्टेशन पर काम कर रहे ऑटो चालकों की आजीविका पर कोई आंच न आए.
वहीं, एरिया मैनेजर अभिषेक सिंघल ने भी कहा कि शुल्क बढ़ोतरी से उत्पन्न स्थिति की समीक्षा कर संबंधित एजेंसियों से बातचीत की जाएगी. यदि आवश्यक हुआ तो पुराने शुल्क ढांचे को बहाल करने या उसमें रियायत देने पर भी विचार किया जाएगा.
टेम्पू चालकों की अन्य समस्याओं पर भी बात
विधायक संजीव सरदार ने इस अवसर पर अधिकारियों से ऑटो चालकों की अन्य जरूरतों—जैसे शेड, विश्राम स्थल, पेयजल और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं की भी मांग रखी. उन्होंने कहा कि टाटानगर स्टेशन का ऑटो स्टैंड शहर के प्रमुख आवागमन केंद्रों में से एक है, जहां हर दिन हजारों यात्री पहुंचते हैं. ऐसे में ऑटो चालकों के लिए बुनियादी ढांचा विकसित करना रेलवे और प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए.
रेल बुनियादी ढांचे पर भी विधायक की सख्त पहल
करनडीह रेलवे अंडर ओवरब्रिज निर्माण को लेकर तेज़ी लाने का निर्देश
बैठक के दौरान विधायक सरदार ने टाटानगर रेल प्रशासन का ध्यान करनडीह रेलवे फाटक पर निर्माणाधीन अंडर ओवरब्रिज की ओर भी आकृष्ट कराया. उन्होंने कहा कि यह परियोजना वर्षों से लंबित है, जिसके कारण आस-पास के ग्रामीणों और शहरी यात्रियों को प्रतिदिन ट्रैफिक जाम, आवागमन में विलंब और दुर्घटनाओं का खतरा झेलना पड़ता है.
उन्होंने अधिकारियों से स्पष्ट शब्दों में कहा कि निर्माण कार्य में अब और विलंब नहीं होना चाहिए और ठेकेदार, अभियंता और रेलवे के समन्वय से कार्य को गति दी जाए. उन्होंने कहा, “लोग वर्षों से इस ब्रिज की प्रतीक्षा कर रहे हैं. यह केवल एक कंक्रीट संरचना नहीं, बल्कि हज़ारों लोगों की राहत और सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है.”
रेलवे अधिकारियों ने जानकारी दी कि परियोजना की फिजिकल प्रगति रिपोर्ट तैयार की जा रही है और निर्माण कार्य में आने वाली तकनीकी अड़चनों को दूर कर इसे जल्द शुरू किया जाएगा.
परसुडीह अंडर ओवरब्रिज के लिए जल्द डीपीआर बनाने का निर्देश
बैठक में एक और अहम मसला परसुडीह अंडर ओवरब्रिज का भी उठा. विधायक संजीव सरदार ने अधिकारियों से आग्रह किया कि इस परियोजना की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) जल्द से जल्द तैयार कर राज्य सरकार को भेजी जाए. उन्होंने जोर देकर कहा कि परसुडीह क्षेत्र की बढ़ती जनसंख्या और ट्रैफिक दबाव को देखते हुए यह ओवरब्रिज अत्यावश्यक है.
उन्होंने यह भी जोड़ा कि योजना की कागजी प्रक्रिया में किसी प्रकार की देरी जनता के साथ अन्याय होगी. रेलवे और राज्य सरकार को मिलकर समयबद्ध रूप से कार्यान्वयन की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए. डीआरएम ने इस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए भरोसा दिलाया कि तकनीकी टीम को डीपीआर तैयार करने हेतु निर्देशित किया जाएगा और प्रक्रिया में तेजी लाई जाएगी.
टाटानगर रेलवे स्टेशन और उसके आसपास के इलाकों से जुड़े ऑटो चालकों, राहगीरों और स्थानीय नागरिकों की समस्याएं लंबे समय से अनदेखी होती रही हैं. किंतु शुक्रवार को विधायक संजीव सरदार द्वारा की गई सक्रिय पहल से न सिर्फ इन मुद्दों को समाधान की दिशा मिली, बल्कि रेलवे प्रशासन भी जागरूक और उत्तरदायी दिखाई पड़ा.

