
* चीफ कंसल्टेंट तथा हेड– हृदय रोग विभाग, टाटा मेन हॉस्पिटल
उदित वाणी, जमशेदपुर : टाटा मेन हॉस्पिटल (टीएमएच) जमशेदपुर के इतिहास में 3 मार्च 2015 एक मील का पत्थर साबित हुआ, जिस दिन समर्पित कार्डियक कैथेटराइजेशन लैब (कैथ लैब) की शुरुआत हुई. यह महज़ एक नई चिकित्सा सुविधा नहीं थी, बल्कि एक संकल्प था—जमशेदपुर और आसपास के लोगों को ऐसा हृदय उपचार उपलब्ध कराना, जिसकी कल्पना कभी दूर की बात लगती थी.
उस दिन से शुरू हुई यह यात्रा सिर्फ तकनीकी प्रगति की नहीं, बल्कि करुणा, विश्वास और समर्पण की थी. आज जब कैथ लैब अपने 10 गौरवपूर्ण वर्षों का उत्सव मना रही है, हम न केवल उन असंख्य ज़िंदगियों को याद कर रहे हैं जिन्हें इसने नई उम्मीद दी, बल्कि उन तमाम पलों को भी सराह रहे हैं, जो टीम भावना, अथक परिश्रम और चिकित्सा उपलब्धियों की गवाही देते हैं.
इनका रहा योगदान
यह सब कुछ संभव नहीं हो पाता अगर उन लोगों का विश्वास और समर्थन न होता, जिन्होंने इस नींव को आकार दिया. इसके पीछे जो प्रेरणास्रोत रहे, वे थे एच एम. नेरुरकर, उस समय टाटा स्टील के मैनेजिंग डायरेक्टर, जिनकी दूरदर्शिता ने इस पहल को दिशा दी. टीवी नरेंद्रन, वर्तमान सीईओ एवं मैनेजिंग डायरेक्टर, जिनके निरंतर प्रोत्साहन और समर्थन से यह सपना साकार हो सका. सुनील भास्करन, तत्कालीन वाइस प्रेसिडेंट – कॉरपोरेट सर्विसेज, ने इस परियोजना को प्रशासनिक गति दी. एयर वाइस मार्शल (सेवानिवृत्त) डॉ. मधुधनन और लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) डॉ. जी. रामदास, दोनों पूर्व जनरल मैनेजर, मेडिकल सर्विसेज, ने प्रणाली और लोगों को एकसाथ जोड़ने में अहम भूमिका निभाई, जिससे यह सपना साकार हो सका.
डॉ.विजया भारत की कल्पना थी
डॉ. विजया भारत, टीएमएच की पहली हेड ऑफ कार्डियोलॉजी, ने न केवल कैथ लैब की कल्पना की, बल्कि इसे साकार करने के लिए अथक परिश्रम किया. वहीं, केयर हॉस्पिटल्स के मार्गदर्शक डॉ. बी. सोमा राजू, डॉ. नरसिम्हन, डॉ. राजीव मेनन और डॉ. स्वरूप भराड़ी—ने हमें अपने पैरों पर खड़ा होने में अमूल्य सहयोग प्रदान किया.
पहले साल में ही एक हजार मामले देखे गए
कैथ लैब ने अपनी स्थापना के पहले ही वर्ष में 1,000 से अधिक मामलों का सफलतापूर्वक संचालन कर एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की. आज सालाना 2,600 से अधिक जटिल हृदय ऑपरेशन किए जाते हैं, जिनमें लगभग 1,400 एंजियोग्राफी, 750 एंजियोप्लास्टी और 300 पेसमेकर इम्प्लांट शामिल हैं. चाहे कैथ लैब में लगी आग जैसी आकस्मिक आपदा हो या कोविड-19 महामारी जैसी वैश्विक चुनौती—हमारी टीम कभी नहीं रुकी, कभी नहीं थकी.
तकनीक में आगे
हमारी सफलता के सबसे मजबूत स्तंभों में से एक रहा है — नवीनतम तकनीक के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने की हमारी प्रतिबद्धता. आज हम जिन अत्याधुनिक तकनीकों का नियमित रूप से उपयोग कर रहे हैं, उनमें शामिल हैं — इंट्रावास्कुलर अल्ट्रासाउंड और ऑप्टिकल कोहेरेंस टोमोग्राफी (ओसीटी) जैसी उन्नत इमेजिंग तकनीकें, रोटेशनल और ऑर्बिटल अथेरेक्टमी जैसे जटिल और कैल्सिफाइड धमनियों के इलाज हेतु नवाचार और इंट्रावास्कुलर लिथोट्रिप्सी (आईवीएल), जिसे झारखंड में पहली बार टाटा मेन हॉस्पिटल ने शुरू किया.
इन-हाउस इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी सुविधाएं
हम झारखंड का एकमात्र ऐसा केंद्र हैं, जहां इन-हाउस इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिसमें ईपी स्टडी और रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन शामिल हैं. हम नियमित रूप से उन्नत पेसमेकर और अन्य हृदय संबंधी डिवाइसेज़ का प्रत्यारोपण करते हैं, जिनमें कंडक्शन सिस्टम पेसिंग जैसे हिज़ बंडल और लेफ्ट बंडल ब्रांच पेसिंग, साथ ही हृदय की धड़कनों की सामान्य लय में गड़बड़ी से पीड़ित मरीजों के लिए एलओटी, सीआरटी और एलओटी एआईसीडी जैसे उन्नत उपकरण शामिल हैं. इसके अलावा हमारे यहां एक समर्पित डिवाइस क्लिनिक भी संचालित होता है, जो पेसमेकर लगाए गए मरीज़ों की निगरानी और समग्र देखभाल सुनिश्चित करता है. और अब एक नई दिशा में अग्रसर होते हुए हमने पेरिफेरल वस्कुलर इंटरवेंशन की प्रक्रियाएं भी शुरू कर दी हैं. ये उपचार हृदय से परे शरीर की अन्य धमनियों—जैसे पैरों और गुर्दों की रक्तवाहिनियों से जुड़ी बीमारियों के लिए किए जाते हैं. यह हमारे क्लिनिकल क्षितिज के एक महत्वपूर्ण विस्तार को दर्शाता है. इस पहल ने एक बड़ी बाधा को दूर किया है. अब मरीजों को उन्नत उपचार के लिए दूर के बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ता. उन्हें विशेषज्ञ देखभाल, अत्याधुनिक तकनीक और गुणवत्तापूर्ण इलाज अब यहीं, अपने घर के पास ही उपलब्ध हो रहा है.
2023 साल रहा मील का पत्थर
वर्ष 2023 में हमने एक नई शैक्षणिक उड़ान भरी — डॉएनबी कार्डियोलॉजी कार्यक्रम की शुरुआत के साथ. यह सुपर-स्पेशियलिटी शिक्षण कार्यक्रम न केवल उभरते हृदय रोग विशेषज्ञों को गहन प्रशिक्षण प्रदान करता है, बल्कि उन्हें जटिल और विविध केस प्रोफाइल के माध्यम से व्यावहारिक अनुभव भी देता है. यहां हमारे रेज़िडेंट्स को सोचने, सवाल पूछने, शोध करने और अपने विचारों को प्रकाशित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, ताकि वे चिकित्सा विज्ञान में ज्ञान के संवाहक बनें, सिर्फ अनुयायी नहीं. हमारे कदम यहीं नहीं थमते. हम लगातार भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं. जल्द ही हम एक अत्याधुनिक सीटीवीएस सेंटर शुरू करने जा रहे हैं, जो हृदय शल्य चिकित्सा में उत्कृष्टता का नया अध्याय होगा. स्ट्रक्चरल हार्ट डिज़ीज़ के इलाज के लिए TAVR और MitraClip जैसी उन्नत प्रक्रियाएं शुरू की जा रही हैं. बच्चों के लिए इंटरवेंशनल पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी सेवाओं की शुरुआत और 3डी मैपिंग से युक्त अत्याधुनिक इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी सेवाओं की भी योजना तैयार है.
समग्र हॉर्ट सेंटर बनाने का सपना
हमारा सपना है एक ऐसा समग्र हार्ट सेंटर बनाना, जो केवल उपचार न करे, बल्कि चिकित्सा करे, जो केवल जीवन बचाए नहीं, बल्कि उन्हें बदल दे. एक ऐसा केंद्र जहां तकनीक हो, करुणा हो, और हर मरीज़ को उम्मीद, गरिमा और एक नया जीवन मिले.और जब हम आगे की ओर देखते हैं, तो हमें पूरा विश्वास है. हमारी सबसे बड़ी उपलब्धियां अभी सामने आनी बाकी हैं. मिलकर, हम हृदय रोग उपचार के भविष्य का निर्माण करते रहेंगे, हर धड़कन के साथ, हर जीवन के लिए, हर दिन.

