
- अगर गांव में जाकर शहर के लोग पिकनिक मनाएं, तो वहां के लोगों को आजीविका मिल सकती है
उदित वाणी, जमशेदपुर: शहरों और गांवों को एक दूसरे से जोड़ने के साथ ही कोविड के बाद तेजी से उभरे मेंटल हेल्थ जैसे गंभीर मुद्दे पर लॉ ग्रैविटी की ओर से एक सिम्पोजियम का आयोजन किया गया. सिम्पोजियम में गांव और शहरों में अपने काम के जरिए बदलाव ला रही संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ ही मीडिया से जुड़े लोगों ने भी अपने विचार व्यक्त किए.
लॉ ग्रैविटी के अविनाश दुग्गर ने सूत्रधार की भूमिका निभाते हुए कहा कि अगर शहर के लोग गांवों में पिकनिक मनाने जाने लगे तो वहां के लोगों को आजीविका के साधन मिलेंगे. इसी तरह उन्होंने गांव के लोगों को कौशल बनाकर उनके स्किल को बेहतर बनाने पर जोर दिया.
गम्हरिया के मोहनपुर में महिलाओं की स्वयं सहायता समूह बनाकर बदलाव की नई इबारत लिखने वाली निकुंज नरेडी के साथ चाईबासा की ब्रांड एम्बेसडर नेहा निषाद, जनजातीय प्रतिभा को मंच दे रही कृतिका मार्डी, एलजीबीटी के अधिकारों को लेकर काम करने वाली नवजोत और सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग देकर लड़कियों को सशक्त बना रही रितिका श्रीवास्तव ने अपने अनुभवों को शेयर किया. साथ ही आरजे अभय, आरजे राजीव, आरजे प्रसून्न, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट अजिताभ गौतम, पत्रकार संजय प्रसाद और अन्नी अमृता ने भी अपने विचार शेयर किए.

