
उदित वाणी, जमशेदपुर: जमशेदपुरवासियों के लिए यह एक दुर्लभ क्षण था, जब बारह वर्षों के लंबे अंतराल के बाद स्वामी अवधेशानंद गिरि नरभेराम हंसराज इंग्लिश मीडियम स्कूल के कुसुमबेन कमानी ऑडिटोरियम में प्रवचन के लिए उपस्थित हुए. श्रद्धालुओं और विद्यार्थियों के बीच शांति मंत्र से अपनी वाणी की शुरुआत करते हुए स्वामी जी ने जीवन, विज्ञान और अध्यात्म के मध्य गहरे संबंधों की व्याख्या की.
“आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बाद केवल परमात्मा”
स्वामी जी ने कहा कि क्वांटम फिजिक्स के बाद अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का युग चल रहा है, लेकिन जब यह भी अपनी चरम सीमा पर होगा, तो आगे क्या आएगा? इसी प्रश्न का उत्तर देते हुए उन्होंने कहा — “एआई के आगे केवल परमात्मा है.” उनके अनुसार, विज्ञान चाहे जितनी ऊंचाइयां छू ले, चेतना, करुणा और अस्तित्व की पूर्णता केवल ईश्वर में ही संभव है.
“हमारा मनुष्य होना एक दिव्य योजना का हिस्सा”
स्वामी अवधेशानंद ने अपने उद्बोधन में कहा कि मनुष्य जन्म केवल जैविक संयोग या पूर्व कर्मों का परिणाम नहीं है. हमारे मनुष्य होने के पीछे सबसे बड़ा कारण है — ईश्वर की कृपा. आदि गुरु शंकराचार्य भी कहते हैं — देवानुग्रह हेतुकम्. उन्होंने कहा कि पौराणिक आख्यानों से स्पष्ट होता है कि परमात्मा ने इस सृष्टि में सबसे अधिक चेतना और विवेक मनुष्य को प्रदान किया. यही कारण है कि देवत्व की पूर्ण उपस्थिति इसी देह में संभव है.
“ईश्वर भूमिका से परे है”
एक रोचक प्रसंग साझा करते हुए स्वामी जी ने बताया कि एक प्रसिद्ध अभिनेता बचपन से ही बूढ़े व्यक्ति की भूमिका निभा रहे हैं और अब जब वे वास्तव में 70 वर्ष के हो गए हैं, तब भी भूमिका ही निभा रहे हैं. उन्होंने कहा कि जीवन एक अभिनय है, लेकिन ईश्वर किसी भूमिका से बंधे नहीं हैं.
भारतीय संस्कृति की विशेषता: हर कण में परमात्मा
स्वामी जी ने भारतीय परंपरा की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पश्चिमी सभ्यता में मनुष्य को ‘सामाजिक पशु’ कहा गया है, लेकिन भारतीय चिंतन में मनुष्य केवल जैविक प्राणी नहीं है. यहां पत्थर में शंकर और जल में नारायण को देखा जाता है. यही कारण है कि शालिग्राम की पूजा होती है.
“कुंभ में आधा भारत”
उन्होंने कहा कि हाल ही में आयोजित कुंभ में ऐसा लगा जैसे आधा भारत वहां उमड़ पड़ा हो. उन्होंने ज्योतिषीय दृष्टिकोण से बताया कि वृष राशि में बृहस्पति और मकर में सूर्य का योग एक विशेष कालखंड है, जो बारह वर्षों में आता है.
पितृलोक और विज्ञान का समन्वय
स्वामी जी ने बताया कि आधुनिक विज्ञान अब ब्रह्मा की गति तक को मापने में सक्षम हो गया है. उन्होंने कहा कि पितृलोक पृथ्वी से लगभग सात डिग्री की दूरी पर स्थित है, जिसे अब वैज्ञानिक भी मान्यता दे रहे हैं. उन्होंने बताया कि श्राद्ध पक्ष के दौरान जब पितरों को अन्न अर्पित किया जाता है, तब उनकी गंध उन तक पहुंचती है. यही कारण है कि अमावस्या की तिथि का विशेष महत्व होता है.
प्रवचन से पहले आशीर्वाद और आग्रह
प्रवचन के पूर्व किल्लोल कमानी ने स्वामी जी का आशीर्वाद लिया. प्रभु प्रेमी संघ के रमेश अग्रवाला ने उनसे आग्रह किया कि वे कम से कम प्रत्येक चार वर्ष में एक बार जमशेदपुर जरूर पधारें. इस पर स्वामी जी ने सहमति दर्शाते हुए मुस्कुराकर सकारात्मक संकेत दिया.

