उदित वाणी, जमशेदपुर: जिला दण्डाधिकारी सह उपायुक्त अनन्य मित्तल ने समाहरणालय की सामान्य शाखा और विधि शाखा का औचक निरीक्षण किया. निरीक्षण के दौरान उन्होंने प्रतिनियुक्त मानव संसाधन की उपस्थिति, अभिलेखों के संधारण और कार्य निष्पादन की बारीकी से समीक्षा की.
बायोमीट्रिक उपस्थिति अनिवार्य: उपायुक्त का स्पष्ट निर्देश
मित्तल ने कर्मचारियों की दैनिक उपस्थिति पंजी की जांच करते हुए सभी को बायोमीट्रिक उपस्थिति अनिवार्य रूप से दर्ज करने का सख्त निर्देश दिया. उन्होंने समय पर कार्य संपादन एवं दस्तावेजों को अद्यतन रखने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया.
प्रमुख रजिस्टरों एवं संचिकाओं का अवलोकन
निरीक्षण के दौरान उन्होंने आगत-निर्गत पंजी, रोकड़ पंजी, सीएनसी रजिस्टर, स्टॉक एवं इंडेक्स रजिस्टर सहित अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों की समीक्षा की. उन्होंने कहा कि सभी संचिकाएं और रजिस्टर सरकारी नियमावली के अनुसार सुव्यवस्थित ढंग से संधारित किए जाएं.
विधि शाखा को मिले स्पष्ट आदेश
विधि शाखा के निरीक्षण में उपायुक्त ने निर्देश दिया कि हाईकोर्ट से संबंधित सभी मामलों को निर्धारित प्रारूप में कंप्यूटर प्रणाली में दर्ज किया जाए. पीआईएल, रिट, अवमानना जैसे प्रकरणों की फाइलें पृथक रखी जाएं. साथ ही एडीसी, एसडीओ और सीओ कोर्ट में लंबित मामलों की अद्यतन रिपोर्ट विधि शाखा से प्राप्त कर समय-समय पर समीक्षा की जाए.
अनुशासन और दक्षता पर दिया गया जोर
मित्तल ने सभी शाखा प्रमुखों को अनुशासित एवं पारदर्शी ढंग से कार्य संचालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि कार्यालयीन व्यवस्था की गुणवत्ता से ही प्रशासनिक सेवा की प्रभावशीलता परिलक्षित होती है.
निरीक्षण के दौरान अपर उपायुक्त भगीरथ प्रसाद, एनईपी निदेशक संतोष गर्ग, कार्यपालक दण्डाधिकारी मृत्युंजय कुमार, चंद्रजीत सिंह सहित अन्य कर्मी उपस्थित थे.
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