
नए सत्र की कक्षाओं में रैगिंग की घटनाएं रोकने को की गई पहल
उदित वाणी, जमशेदपुर: विश्वविद्यालयों, कॉलेजों व उच्च शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थी और उनके अभिभावक अब तक हर शैक्षणिक वर्ष में स्वहस्ताक्षरित ‘एंटी रैगिंग शपथ पत्र’ का पीडीएफ व हार्ड कॉपी जमा करते आ रहे हैं. यूजीसी ने इस नियम में संशोधन कर दिया है. अब एंटी रैगिंग शपथ पत्र अनिवार्य रूप से ऑनलाइन जमा करना होगा.
नयी व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों को पंजीकरण संख्या के साथ एक ई- मेल प्राप्त होगा. विद्यार्थी उस ई-मेल को अपने विवि, कॉलेज, संस्थान के नोडल अधिकारी के ई-मेल में भेजेंगे. सभी विवि, कॉलेजों व संस्थानों को अपने यहां गठित एंटी रैगिंग कमेटी व उसके नोडल अधिकारी का ई-मेल, पता व संपर्क नंबर वेबसाइट सहित कैंपस के महत्वपूर्ण स्थान जैसे प्रवेश द्वार, नोटिस बोर्ड, विभाग, पुस्तकालय, हॉस्टल व सामान्य सुविधा आदि स्थानों पर प्रदर्शित करना होगा. एंटी रैगिंग शपथ पत्र का फॉर्मेट विवि, कॉलेज, संस्थानों के प्रोस्पेक्टस में डालना होगा.
सभी संस्थानों को दिये गये निर्देश
इस संबंध में यूजीसी ने कहा है कि सभी संस्थान एंटी रैगिंग का प्रचार-प्रसार करायें, एंटी रैगिंग कमेटी सहित दस्ता का गठन, एंटी रैगिंग सेल की स्थापना, कैंपस में सीसीटीवी लगाये विद्यार्थियों के बीच एंटी रैगिंग कार्यशाला, सेमिनार, व्याख्यान, अलार्म, घटी आदि की व्यवस्था करें.
विद्यार्थियों से नियमित बातचीत, काउंसेलिंग, शरारती विद्यार्थियों की पहचान और ई-प्रोस्पेक्टस और ई सूचना पुस्तिकाओं, विविरणिकाओं में एटी रैगिंग चेतावनी का उल्लेख सुनिश्चित करायें संस्थानों में बनी टीम को विभिन्न जगहों जैसे कैटीन, हॉस्टल, मनोरंजन कक्ष, शौचालय, बस अड्डों आदि जगहों का औचक निरीक्षण कराना सुनिश्चित कराये.
कैंपस में आठ गुणा छह फीट आकार के एंटी रैगिंग पोस्टर लगायें. पोस्टर यूजीसी की वेबसाइट पर उपलब्ध है. रैगिंग से प्रभावित विद्यार्थी हेल्पलाइन नंबर 1800 1805522 पर कॉल कर सकते हैं या (द्धद्गद्यश्चद्यद्बठ्ठद्गञ्चड्डठ्ठह्लद्बह्म्ड्डद्दद्दद्बठ्ठद्द.द्बठ्ठ) पर ई-मेल कर सकते हैं.
एनईपी का इंटर्नशिप करेंगे छात्र
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने देश के सभी विश्वविद्यालयों एवं कॉलेजों से युवाओं को शिक्षा मंत्रालय के भारतीय ज्ञान परंपरा (आईकेएस) प्रभाग के भारतीय ज्ञान संवाहक या इंटर्नशिप कार्यक्रम का लाभ उठाने के लिये प्रोत्साहित करने को कहा है.
छह माह के इस प्रशिक्षुता (इंटर्नशिप) कार्यक्रम के लिये चुने गए प्रशिक्षु राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के कार्यान्वयन से जुड़े कार्यों में सहायता करेंगे. 2022-23 से शुरू होने वाले इस प्रशिक्षुता कार्यक्रम के तहत अध्येतावृत्ति के रूप में 10 हजार रुपये प्रतिमाह प्रदान किया जायेगा.
आईकेएस प्रभाग ने भारतीय ज्ञान परंपरा पर चार कार्यक्रम शुरू किये हैं जिसमें भारतीय ज्ञान परंपरा संवद्र्धन योजना, भारतीय ज्ञान परंपरा संपोषण केंद्रम-1, भारतीय ज्ञान परंपरा संपोषण केंद्रम-2 और भारतीय ज्ञान संवाहक या इंटर्नशिप कार्यक्रम शामिल है.
पत्र में विश्वविद्यालयों के कुलपतियों एवं कॉलेजों के प्राचार्यों से आग्रह किया गया है कि वे आईकेएस प्रभाग द्वारा प्रारंभ किये गए भारतीय ज्ञान संवाहक (इंटर्नशिप) कार्यक्रम से जोडऩे एवं लाभ उठाने के लिये युवाओं को प्रोत्साहित करें.
आईकेएस प्रभाग के भारतीय ज्ञान संवाहक कार्यक्रम की पुस्तिका के अनुसार, विभिन्न पक्षकारों से प्राप्त प्रतिक्रिया के आधार पर अधिकतम छह माह का प्रशिक्षुता कार्यक्रम तैयार किया गया है.
दरअसल शिक्षा मंत्रालय के तहत भारतीय ज्ञान परंपरा प्रभाग के प्रशिक्षुता कार्यक्रम में युवाओं को भारतीय भाषा में भारतीय ज्ञान परंपरा से संबंधित विविध विषयों का गहन अध्ययन करने के लिये प्रोत्साहित किया जा रहा है.
इसके तहत छात्र ग्रीष्मकालीन अवकाश के समय या वर्ष में किसी भी समय सक्रिय अनुसंधान में योगदान कर सकते हैं.इसमें कहा गया कि इस कार्यक्रम में अन्य कार्यों के साथ राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के कार्यान्वयन में सहायता करने का काम भी शामिल है.
इसमें पाठ्य सामग्री, डिजिटल मीडिया, मल्टी मीडिया संसाधन, विद्यालयी शिक्षा एवं स्नातक शिक्षा पाठ्यक्रम सामग्री आदि के निर्माण में सहयोग करना प्राथमिकता है.
पर शिक्षकों को मिलेगा बीमे का लाभ
झारखंड में समग्र शिक्षा अभियान के तहत कार्यरत 65 हजार पारा शिक्षकों (सहायक अध्यापकों) का बीमा होगा. उन्हें ग्रुप बीमा तथा दुर्घटना बीमा से जोड़ा जाएगा.
ग्रुप बीमा में जीवन बीमा तथा सेवानिवृत्ति लाभ दोनों शामिल हैं. इससे पारा शिक्षकों को 60 वर्ष की सेवा पूरी करने पर उन्हें एकमुश्त राशि सेवानिवृत्ति लाभ के रूप में मिलेगी ताकि उक्त राशि से वे आगे का जीवन ठीक ढंग से बसर कर सकें.
सबसे बड़ी बात यह है कि इन सभी सुविधाओं का लाभ समग्र शिक्षा अभियान के तहत ही कार्यरत प्रखंड साधन सेवियों (बीआरपी) तथा संकुल साधन सेवियों (सीआरपी) के अलावा कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों व कर्मियों को भी मिलेगा.
झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने ये सभी सुविधाएं प्रदान करने के लिए बीमा कंपनी के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है.
अबतक की तैयारी के अनुसार, पारा शिक्षकों एवं अन्य कर्मियों को पांच लाख रुपये तक का दुर्घटना बीमा कराया जाएगा. दुर्घटना में मृत्यु होने पर आश्रित को बीमा राशि का लाभ मिलेगा. इसमें दुर्घटना के बाद आंशिक या पूर्ण रूप से दिव्यांग होने पर भी बीमा राशि का प्रविधान किया गया है.
ग्रुप बीमा दस लाख रुपये तक का होगा. बीमा में प्रीमियम की राशि पारा शिक्षकों व अन्य कर्मियों की आयु के अनुसार होगी. बीमा कंपनी को प्रीमियम का भुगतान कल्याण कोष से किया जाएगा. झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद द्वारा इन सुविधाओं की निगरानी के लिए रिव्यू कमेटी गठित करने का भी निर्णय लिया है.

