
मारपीट रोकने को बुलानी पड़ी पुलिस
उदित वाणी, जमशेदपुर: जमशेदपुर वर्कर्स कॉलेज मानगो में मंगलवार को छात्र नेताओं के दो गुटों के बीच मारपीट हो गई. बात इतनी बढ़ी कि पुलिस को बुलानी पड़ गया. बाद में पुलिस के समझाने बुझाने पर मामला शांत हुआ.
विवाद छात्र आजसू व अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) के छात्र नेताओं के बीच हुआ. मारपीट तब हुई जब कॉलेज में इंटरमीडिएट (12वं) का एडमिशन और एग्जामिनेशन फॉर्म भरने के लिए कतार में खड़े होने को लेकर बहस हुई.
बहस इसलिए हुई, क्योंकि छात्र कतार में लगे थे और कथित तौर पर अभाविप के छात्र नेता कतार तोड़कर अपने समर्थकों का फार्म भरवा रहे थे. इसी बात पर आजसू नेता राजेश महतो व अभाविप नेता शुभम राज के बीच मारपीट हो गई.
छात्र आजसू का आरोप है कि इंटर का फार्म भरने के लिए सैकड़ों छात्र लाइन में लगे हुए थे और अभाविप के सुभम सिंह नामक छात्र नेता अन्य छात्रों से पैसा लेकर काउंटर के अंदर जाकर सभी का फॉर्म जमा करवा रहा था. इस को देखते हुए कॉलेज के पूर्व अध्यक्ष राजेश महतो ने हेड असिस्टेंट मनमोहन गांधी से शिकायत की. इस दौरान गांधी ने सभी छात्र नेताओं को काउंटर से बाहर कर दिया.
उसके बाद राजेश महतो मामले में मनमोहन गांधी से बात करने लगा. आरोप है कि तभी पीछे से शुभम सिंह ने आकर धक्का दिया और राजेश महतो को थप्पड़ जड़ दिया. इसके बाद आजसू के छात्र नेताओ के साथ जमकर मारपीट हुई. विवाद बढ़ता देख प्राचार्य के द्वारा पुलिस को बुलाया गया. पुलिस जाने के बाद मामले में सुलह कर लिया गया.
राजेश महतो ने कहा कॉलेज में दूर दराज से छात्र आते हैं. सुबह से कड़ी धूप में विद्यार्थी लाइन लगे हुए थे और इस दौरान अभाविप के नेता अपने अपने लोगों और अन्य छात्रों का फॉर्म लेकर अंदर से जमा करवा रहे थे. बहुत से छात्रों ने शिकायत की तो उसने कॉलेज प्रबंधन को शिकायत की. इसके बाद शुभम ने हमला कर दिया.
अभाविप ने छात्र आजसू के नेताओं पर उठाए सवाल
भाविप नेता बापन घोष ने कहा कि छात्र आजसू के जिन कार्यकर्ता के साथ मारपीट करने का आरोप परिषद् के कार्यकर्ता पर लगाया जा रहा है, जांच करने पर पता चलेगा कि वो महाविद्यालय के छात्र नहीं हैं.
कहा कि आजसू के अधिकतर छात्र नेता 8-10 साल से अधिक समय से महाविद्यालय में जमे हुए हैं.
वैसे लोग प्रतिदिन विद्यार्थियों को बरगलाने के लिए सुबह से लेकर शाम तक कॉलेज परिसर में जमे हुए होते हैं.
इससे कई बार महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय का अनुशासन भंग हुआ है, लेकिन उनलोगों पर आज तक कोल्हान विश्वविद्यालय की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है.
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