
उदित वाणी जमशेदपुर: डिमना स्थित एमजीएम मेडिकल कॉलेज अस्पताल परिसर में इन दिनों आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। अस्पताल परिसर में दर्जनों की संख्या में कुत्तों के झुंड के घूमने से कर्मचारी, छात्र और मरीजों के परिजन दहशत में हैं। स्थिति यह है कि दिन-रात कुत्तों के झुंड खुलेआम घूमते रहते हैं, जिससे किसी भी समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। शनिवार की सुबह इस समस्या की गंभीरता तब सामने आई जब अस्पताल परिसर में तैनात पीएचईडी कर्मचारी सिमोन पूर्ति (56 वर्ष) पर पंप चालू करने के लिए जाते समय एक आवारा कुत्ते ने हमला कर दिया। तामोलिया निवासी सिमोन पूर्ति पर सुबह करीब 5 बजे कुत्ते ने हमला करते हुए उनके दाहिने पैर की जांघ के नीचे काट लिया। उस समय वहां कई कुत्ते झुंड में मौजूद थे।
बताया जाता है कि सिमोन पूर्ति ने किसी तरह पत्थर उठाकर कुत्ते को भगाया और अपनी जान बचाई। घटना के बाद वे इलाज के लिए एमजीएम अस्पताल पहुंचे।
पीड़ित सिमोन पूर्ति ने बताया कि अस्पताल में इलाज के दौरान उन्हें एंटी रैबीज इंजेक्शन लगाने के लिए कहा गया, लेकिन अस्पताल में इंजेक्शन उपलब्ध नहीं होने की बात कहकर उन्हें बाहर से खरीद कर लाना पड़ा। इसके बाद उन्होंने पास के मेडिकल स्टोर से करीब 2300 रुपये का इंजेक्शन खरीदकर लगवाया। उन्होंने बताया कि डॉक्टरों ने उन्हें 13 तारीख तक तीन और इंजेक्शन लगवाने की सलाह दी है, जिसके लिए उन्हें अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ेगा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि एमजीएम अस्पताल परिसर मानगो नगर निगम क्षेत्र में आता है, लेकिन आवारा कुत्तों को पकड़ने या उनकी संख्या नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। यही कारण है कि अस्पताल परिसर से लेकर आसपास के मोहल्लों तक कुत्तों की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। लोगों का कहना है कि मानगो क्षेत्र की लगभग हर गली-मोहल्ले में आवारा कुत्तों का आतंक है और आए दिन कोई न कोई इनके हमले का शिकार हो रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग इस दिशा में गंभीर नहीं दिख रहा।
इस संबंध में एमजीएम अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. जुझार माझी ने बताया कि एंटी रैबीज का महंगा इंजेक्शन संभवतः एक ही बार लगता है। उसके बाद जो इंजेक्शन लगाया जाता है वह कम कीमत वाला होता है और उसका स्टॉक अस्पताल में उपलब्ध है। ऐसे इंजेक्शन के लिए मरीजों को बाहर से खरीदने की आवश्यकता नहीं पड़नी चाहिए।फिलहाल, अस्पताल परिसर में बढ़ते आवारा कुत्तों के आतंक से कर्मचारी, मरीज और उनके परिजन असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। स्थानीय लोगों ने नगर निगम से जल्द कार्रवाई कर इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने की मांग की है।

