
उदित वाणी, जमशेदपुर : झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार ने कहा कि 75 वर्ष की यात्रा किसी भी संस्था के लिए एक साधारण उपलब्धि नहीं होती है. यह उपलब्धि दर्शाती है कि चैंबर की नींव कितनी मजबूत है. इसके संस्थापक सदस्यों की सोच, दूरदर्शिता और समर्पण कितना दृढ़ रहा है. यह वास्तव में आपके अटल विश्वास, कठिन परिश्रम और निष्ठा का ही परिणाम है कि आज यह संस्था झारखंड की सबसे प्रभावशाली औद्योगिक मंचों में से एक बन चुकी है. गंगवार, शनिवार को चैंबर भवन बिष्टुपुर में चैंबर के प्लैटिनम जुबिली समारोह के तहत आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने चैंबर के 75 साल पूरा करने पर बधाई दी और कहा कि मुझे प्रसन्नता है कि चैंबर की युवा टीम इस परम्परा और विरासत को आगे बढ़ाने का काम कर रही है.
एक आदर्श सामाजिक और औद्योगिक मॉडल है जमशेदपुर
जमशेदपुर की पहचान केवल इस्पातनगरी और औद्योगिक नगरी के रूप में नहीं है, बल्कि एक आदर्श सामाजिक और औद्योगिक मॉडल के रूप में स्थापित हुआ है. टाटा समूह की दूरदर्शी ने इस शहर को शिक्षा, स्वास्थ, पर्यावरण और कौशल विकास के क्षेत्र में अग्रणी बनाया है. हाल ही में इस नगरी ने स्वच्छता रैंकिंग में देश भर में तीसरा स्थान प्राप्त किया है, जिसके लिए आप सभी को बधाई देना चाहूंगा.
प्रभावी औद्योगिक मंच है
साथियों यह संस्था अविभाजित बिहार की न केवल दूसरी सबसे बड़ी व्यावसायिक संस्था रही है, बल्कि झारखंड राज्य में सबसे प्रभावी औद्योगिक मंच के रूप में उभरी है. हाल ही में लोकसभा अध्यक्ष आदरणीय श्री ओम बिरला जी ने इस संस्था के प्लैटिनम जुबिली समारोह में शामिल हुए थे. मुझे अवगत कराया गया है कि वर्तमान में चैंबर के साथ कोल्हान प्रमंडल के ढ़ाई हजार से अधिक उद्यमी, व्यापारी और प्रोफेशनल जुड़े हैं, जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप में लगभग ढ़ाई लाख लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं. यह अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है.
मोदी जी के नेतृत्व में देश आगे बढ़ रहा
साथियों, आज भारत पूर्ण आत्मबल के साथ विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है. हमारी अर्थव्यवस्था विश्व की चौंथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुकी है. माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में हम पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की ओर तीव्र गति से अग्रसर है. आत्मनिर्भर भारत, मेकिंग इंडिया और वोकल फॉर लोकल जैसे अभियानों ने देश के व्यापारी और औद्योगिक जगत को नई दिशा और ऊर्जा प्रदान किया है. मुझे विश्वास है कि झारखंड के चैंबर विशेष रूप से सिंहभूम चैंबर इस प्रयासों में शक्ति बन कर उभरे.
आर्थिक विकास को रोजगार से जोड़ें
मुझे यह जानकर प्रसन्नता हो रही है कि संस्था ने माइक्रो, स्मॉल एवं मीडियम इंटरप्राइजेज को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ नवाचार, स्टार्ट अप और हरित औद्योगिकरण को भी अपने एजेंडे में स्थान दिया है. ये वो कारक है जो आर्थिक विकास को रोजगार से और तकनीक को समाज से जोड़ता है.
भारत की आर्थिक रीढ बन सकता है झारखंड
मैं विशेष रूप से कहना चाहूंगा कि झारखंड जैसे राज्य जहां प्राकृतिक संसाधनों की विपुलता है. यहां कोयला, लोहा और परिश्रमी युवा शक्ति प्रचूर मात्रा में है. यहां अगर उद्योग, कौशल और नीति का समन्वय हो तो यह क्षेत्र भारत की आर्थिक रीढ़ बन सकता है. इस अवसर पर मैं आह्वान करना चाहूंगा कि आने वाले वर्षों में चैंबर की भूमिका केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहकर सामाजिक विकास, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की दिशा में काम करेगा. जब उद्योग, समाज से जुड़ता है, तभी समृद्धि होती है.
हायर एजुकेशन में सबसे पीछे
मित्रों, अभी आप लोग कुछ बातें कह रहे थे. मैं महसूस करता हूं कि शिक्षा के क्षेत्र में हमारा झारखंड राज्य को बहुत काम करना चाहिए. देश के शिक्षण संस्थानों में हम अपनी प्रतिस्पर्धा उस हिसाब से नहीं बना पाए है, जैसा हमको बनानी चाहिए. मुझे जानकारी में आया है कि हायर एजुकेशन में हमारा राज्य देश में बहुत पीछे है. हमें सक्रियता इस दिशा में करनी है और अपने आप को आगे बढ़ाना है. यह वास्तव में हम सबकी जिम्मेवारी और काम करने का अवसर है. अगर हम उद्योग को आगे बढ़ाना चाहते हैं तो इस क्षेत्र में भी हमें काम करना होगा. इसमें आप सब लोग, जो यहां बैठे हैं, आप लोगों की जिम्मेवारी हमें ज्यादा समझ में आती है. इसके पहले चैंबर के अध्यक्ष विजय आनंद मूनका ने स्वागत भाषण दिया और चैंबर के इतिहास और उपलब्धियां बताईं. मौके पर चैंबर के महासचिव मानव केडिया समेत चैंबर के सारे पदाधिकारी, कोल्हान के उद्यमी, व्यापारी और गणमान्य लोग मौजूद थे.
इंटरैक्टिव सत्र में किसने क्या पूछा
सवाल-मुरलीधर केडिया-पश्चिम सिंहभूम में किरीबुरू क्षेत्र को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है?
राज्यपाल-मैं कहना चाहूंगा कि जब मैं इस राज्य में आया और यहां की स्थिति को समझा और महसूस किया कि इस राज्य को देश के अग्रणी राज्यों में होना चाहिए था. हमारे जमीन के अंदर कितना धरोहर है, हम उसका सही उपयोग नहीं कर पा रहे हैं. बिहार के बंटवारे के बाद, मुझको बिहार के लोग कहते हैं कि बिहार की सारी संपत्ति, झारखंड में चली गई. पर हम झारखंड को उस हिसाब से पहचान नहीं बना पाए है. एक और बात है कि शिक्षा के क्षेत्र में हमारा राज्य, खासकर हायर एजुकेशन में देश में सबसे पिछड़ा राज्य है. इसको सही करने की जिम्मेवारी किसकी है? आप इस दिशा में चिंता भी कर सकते हैं और सही सुझाव भी दे सकते है. हमारा आपसे आग्रह है कि वह सुझाव दिजिए, जिससे हम इस राज्य को आगे बढ़ा सके. इस लोकतंत्रीय व्यवस्था में आप कैसे व्यक्ति को चुनते हैं? बहुत सी बातें इस पर निर्भर करती है. देश के प्रधानमंत्री जो है, वो अब हम अपनी अर्थव्यवस्था को किस ढंग से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं, हमे इस बात को समझना चाहिए. मैं आगे नहीं बोलना चाहूंगा, मगर मेरा आपसे आग्रह है कि आप अपनी जिम्मेवारी से कैसे काम कर रहे हैं, आगे बढ़ रहे है, आपकी चिंता होनी चाहिए.
सवाल-एके श्रीवास्तव-सरकार को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि हम उद्यमियों की स्टील कंपनी पर निर्भरता कम हो.
राज्यपाल-आप लोग यह सोचिए कि हमारा राज्य कैसे आगे बढ़ें? देश का कैसे अग्रणी राज्य बनें? हमारा मुकाबला महाराष्ट्र से नहीं है, पर यह जरूर है कि हमें कुछ करना चाहिए, अपनी पहचान बनानी चाहिए. प्रैक्टिकली बताइए कि ये काम ऐसे होना चाहिए?
संदीप मुरारका-कंपनियों के सीएसआर का पैसा झारखंड में खर्च नहीं होता.
राज्यपाल-मैं इस विषय में ज्यादा पड़ना नहीं चाहता हूं. हमारे यहां का पैसा दूसरी जगह क्यों जा रहा है? समझने की आवश्यकता है. अब सबके सामने हम नहीं बोल सकते.
एयपोर्ट की अब कोई जरूरत नहीं
मैं बरेली का रहने वाला हूं. हमारे यहां इतना बड़ा एयरपोर्ट है, पर वह सेना का है. सारे बड़े से बड़ा विमान हमारे यहां उतरता है और अंडरग्राउंड हैंगर भी है. पर सिविल एयरपोर्ट नहीं चल पाता है क्योंकि यात्री नहीं मिलते. हमारे देश में दुनिया में सबसे ज्यादा एयरपोर्ट है. एयरपोर्ट की बात यात्रियों से ही बनेगी. हमारे भूतल परिवहन मंत्री ने इतनी बढ़िया सड़के बनवा दी कि छोटी-छोटी दूरी को कार से चलना पसंद करते हैं. अब ढ़ाई सौ-तीन सौ किलोमीटर की दूरी तीन घंटे में चले जाएंगे, तो फिर एयरपोर्ट पर कोई क्यों जाएगा?
सीएम बनते ही मुयाम सिंह यादव ने सारे को ऑपरेटिव पर कब्जा कर लिया, मगर मेरे को ऑपरेटिव को चलने दिया
हमारे राज्य में संभावनाएं बहुत हैं. इन संभावनाओं का हम सदुपयोग करें. सदुपयोग करने के लिए कहना ही काफी नहीं है, पर प्रैक्टिकली हम कैसे उसे इम्प्लीमेंट करें, इस दिशा में हमलोग काम करें. हम उस राज्य के है, जहां राजनीतिक सक्रियता बहुत है. मैं को ऑपरेटिव से भी जुड़ा हुआ हूं. हमारे राज्य में जब श्री मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री बने, तो उन्होंने पूरे को ऑपरेटिव सेक्टर पर कब्जा कर लिया. मैं ही अकेला व्यक्ति हूं, जो उतर प्रदेश में एक को ऑपरेटिव बैंक चलाता हूं. हमारे बैंक के खिलाफ श्री मुलायम सिंह यादव ने भी कोई कार्रवाई नहीं की, क्योंकि उन्होंने कहा कि यह संतोष जी का बैंक है, और सही चल रहा है. हम लोग काम करें. कहीं विरोध है तब भी कोई दिक्कत नहीं है. मैं अकेला व्यक्ति हूं, जो उतर प्रदेश में को ऑपरेटिव बैंक चलाता हूं. मुझसे विपक्षी भी नाराज नहीं होते. मेरा कहना है कि हमारा राज्य आगे कैसे बढ़े? आप इसकी चिंता करिए, संभावनाएं यहां बहुत है. देश के प्रधानमंत्री जिस तरह से काम कर रहे हैं? आज ही आपने देखा होगा कि मालदीप के प्रधानमंत्री का क्या रवैया था, मगर मोदी जी के जाते ही रवैया बदल गया.

