
उदित वाणी, जादूगोड़ा: सूतमताड़ी गांव में शिकार पूर्व के दूसरे दिन आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला. मुखिया अनिता मुर्मू समेत 121 श्रद्धालु गांव के रांगा पहाड़ देवता के दरबार में अपनी मन्नतें लेकर पहुँचे. परंपरानुसार, पहले लोकनृत्य और संगीत के माध्यम से रांगा पहाड़ देवी-देवताओं को आमंत्रित किया गया. इसके बाद श्रद्धालुओं ने जल से भरे लौटा के साथ देवताओं के समक्ष प्रार्थना की.
10 मन्नतें हुईं पूरी, चढ़ाई गई बकरी और बत्तख
जिन 10 श्रद्धालुओं की पूर्व में मांगी गई मन्नतें पूरी हुई थीं, उन्होंने आभार स्वरूप बकरी और बत्तख देवता को अर्पित किए. यह सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समुदाय की परंपरा और गहन आस्था की प्रस्तुति थी.

विशेष प्रार्थनाएँ: विकलांग बेटी और गूंगे बेटे के लिए मांगी दुआ
नीमडीह, मुसाबनी की 16 वर्षीय विनीता मार्डी, जो पैर से विकलांग है और चल नहीं सकती, उसकी मां सुनिया मार्डी ने बेटी के ठीक होने की मन्नत मांगी.
राजनगर के बहादुरगंज निवासी गुपीया हेंब्रम, जो चार वर्ष से वाणीहीन है, उसकी मां भी इस धार्मिक आयोजन में पुत्र की चिकित्सा-कुशलता की प्रार्थना लेकर पहुँचीं. इस प्रकार, कुल 121 परिवारों ने अपने दुखों और आशाओं को रांगा पहाड़ देवता के चरणों में रखा.
सामाजिक सहभागिता भी रही सराहनीय
इस आयोजन में राजदोहा माझी बाबा, माझी युवराज टुडू, सामाजिक कार्यकर्ता शिवचरण मुर्मू, विधायक प्रतिनिधि भरत सरदार, राजदोहा टोला प्रधान सिमल हेंब्रम समेत आसपास के कई गांवों के सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित थे.
परंपरा, आस्था और जीवंत संस्कृति की झलक
यह आयोजन केवल धार्मिक नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की गहन आस्थाओं और सांस्कृतिक जीवन पद्धति की सशक्त अभिव्यक्ति भी था. सूतमताड़ी में रांगा पहाड़ देवता के दरबार में जुटी भीड़ यह सिद्ध करती है कि परंपराएं आज भी जीवित हैं और नई पीढ़ियों को जोड़ने में सक्षम हैं.

