
उदित वाणी, जमशेदपुर : जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने कहा है कि शहर की पुलिस द्वारा दर्ज आपराधिक कांडों के अनुसंधान के क्रम में राजनीतिक या अन्य तरह के प्रभाव में निर्णय लेना और कानून के प्रावधानों की अनदेखी करना गंभीर चिंता का विषय है. उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में ठोस प्रमाण न होने के बावजूद आरोप सिद्ध करार दिए गए, वहीं जिन मामलों में प्रमाण मौजूद हैं, उनमें महीनों तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई.
सरयू राय ने अपने बयान में कहा कि वरीय पुलिस अधिकारियों को अनुसंधानकर्ताओं की इस प्रवृत्ति को रोकना और ऐसे मामलों में सुधार लाना चाहिए. यदि ऐसा नहीं हुआ तो कानून के प्रावधान राजनीतिक चालों का शिकार बनकर रह जाएंगे.
उन्होंने कहा कि कांग्रेस से जुड़े एक व्यक्ति ने 6 अक्टूबर 2024 को कदमा थाना में एक पत्रकार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी. मामला तत्कालीन मंत्री के तथाकथित सम्मान से जुड़ा था. शिकायत में ठोस तथ्य नहीं थे, फिर भी पुलिस ने अनुसंधान कर मामला आगे बढ़ाया. जानकारी के अनुसार, सिटी एसपी ने भी आरोपों को सही माना. लेकिन चार्जशीट दाखिल करने के समय पता चला कि आरोपी से पूछताछ ही नहीं हुई थी और 14 माह बाद उसे नोटिस भेजा गया. सरयू राय ने कहा, “इससे अधिक हास्यास्पद अनुसंधान और क्या हो सकता है.”
इसी तरह, नवंबर 2024 में मोहरदा निवासी सुधीर सिंह द्वारा साकची थाना में दर्ज प्राथमिकी को साइबर थाना भेज दिया गया, लेकिन एक वर्ष बाद भी मामला सुलझा नहीं. श्री राय के अनुसार, इस जांच में देरी का कारण यह है कि निष्पक्ष अनुसंधान से सत्ताधारी दल के एक नेता के हित प्रभावित होते हैं.
सरयू राय ने मानगो थाना में हाल में हुए हमले का उल्लेख करते हुए कहा कि मुख्य आरोपी अभी भी गिरफ्त से बाहर हैं. “ये लोग एक दबंग राजनेता के साथ सार्वजनिक कार्यक्रमों में देखे जा रहे हैं, जबकि पुलिस की मौजूदगी वहीं होती है,” उन्होंने कहा. राय ने आरोप लगाया कि आरोपियों का अवैध कारोबार और कब्जे थाने के पास ही चल रहे हैं, लेकिन स्थानीय पुलिस कार्रवाई से बच रही है.
उन्होंने कहा कि एक अन्य मामले में न्यायालय के आदेश पर वीडियो फ़ॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया था, जिसमें रिपोर्ट मिली कि वीडियो की छवि साफ़ नहीं है. यह मामला भी सत्ता पक्ष के एक प्रमुख नेता से संबंधित है.
राय ने कहा कि ऐसे कई उदाहरण हैं जिनमें जमशेदपुर पुलिस दबाव में काम कर रही है और अनुसंधान की प्रक्रिया हास्यास्पद बन गई है. उन्होंने पूछा कि क्या जिले के वरीय पुलिस अधिकारी अब भी इस स्थिति पर ध्यान देंगे या आंखें मूंदे रहेंगे?

