
उदित वाणी, जमशेदपुर: विविध भारती के लोकप्रिय प्रेजेन्टर युनूस खान ने कहा कि यह रेडियो ही है, जहां पर प्रेजेन्टर किसी कंपनी से बड़ा हो जाते हैं. बिनाका गीत माला कार्यक्रम की मिसाल देते हुए कहा कि यह कार्यक्रम एक टूथपेस्ट को बेचने के लिए बना था, मगर कलांतर में लोगों की जेहन में अमीन सयानी की आवाज जब्त होकर रह गई, जो इसके प्रस्तुतकर्ता थे.
खान सोमवार को करीम सिटी कॉलेज के मास कम्युनिकेशन विभाग की ओर से रेडियो के सौ साल पूरे होने पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे.
उन्होंने बताया कि कैसे बिनाका गीतमाला अपने दौर का सबसे लोकप्रिय कार्यक्रम बन गया और अमीन सयानी की आवाज एक मिथक बन गई. रेडियो सिलोन से होने वाले इस कार्यक्रम के विकल्प के तौर पर भारत सरकार ने देश में विविध भारती की वाणिज्यिक सेवा का शुभारंभ किया, जो बाद में देशवासियों के मनोरंजन का खजाना बना.
विविध भारती, 60 और 70 के दशक में भारतीय मध्यमर्ग का बैकग्राउंड म्यूजिक बन गया. युनूस खान ने रेडियो के बदलते प्रस्तुतिकरण के बारे में कहा कि 80 के दशक तक ठहराव का दौर था.
उस वक्त तक लोग सुकून से रेडियो को सुना करते थे, लेकिन बाद में जिंदगी की भागमभाग और डिस्को के तेज संगीत ने इस सुकून को स्पीड में बदला और प्रस्तुतिकरण का अंदाज भी बदल गया. लेकिन प्राइवेट एफएम आने के बाद आवाज की गति का ऐसा चेहरा दिखा, जो सुकून कम, शोर ज्यादा था. युनूस खान ने बेहद रोचक अंदाज में पुराने कार्यक्रमों के पेश करने के अंदाज ए बयां किया.
महिलाओं को सशक्त करने में रेडियो की भूमिका अहम रही है- ममता सिंह
विविध भारती की ही एक दूसरी प्रस्तोता ममता सिंह ने स्त्री सशक्तिकरण पर वीडियो की भूमिका पर अपनी बात रखी. कई जीवंत उदाहरणों के माध्यम से उन्होंने बताया कि किस प्रकार रेडियो ने स्त्रियों में आधुनिक चेतना जागृत की है.
चाहे वह ग्रामीण महिला हो या शहरी स्त्रियों के साथ. रेडियो अपने तमाम कार्यक्रमों के माध्यम से हमेशा खड़ा रहा है. शालिनी वर्मा ने तमाम प्रवासी भारतीयों का प्रतिनिधित्व करते हुए बताया कि किस प्रकार विदेशों में बसे भारतीयों को रेडियो अपनी भाषा और संस्कृति से जुड़े रखता है.
उन्होंने बताया कि कतर में कितने भारतीय रहते हैं जो विभिन्न भाषाओं के हैं, लेकिन वहां हिंदी का उपयोग करते हैं और रेडियो की वजह से अपने आप को देश के नजदीक समझते हैं.
उन्होंने करोना काल का उल्लेख करते हुए कहा कि वह रेडियो ही था जो सही और सलीकेदार तरीके से जानकारी दे रहा था.
पांचवें दिन भी पेपर प्रस्तुत किए गए
संगोष्ठी के अंतिम दिन हुए पांचवें सत्र में दोहा ,लंदन, अमेरिका ,दिल्ली व मलेशिया से ऑनलाइन जुड़कर शोधार्थियों ने अपने पत्र प्रस्तुत किए. इस सत्र की अध्यक्षता डॉक्टर संजीव भनावत ने की.
समापन समारोह में कम्युनिकेशन टुडे के संपादक एवं राजस्थान यूनिवर्सिटी के मास कम्युनिकेशन के संस्थापक व सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ संजीव भनावत ने विस्तार से रेडियो के जनसंचार माध्यम के रूप में विभिन्न आयामों और भविष्य की दशा और दिशा पर प्रकाश डाला. बिग एफएम के क्लस्टर हेड शादाब उमर हाशमी ने एफएम प्रसारण की चुनौतियों के विषय में बताया.
मौके पर डॉ. सी भास्कर राव और करीम सिटी कॉलेज के निदेशक शिक्षा डॉ मोहम्मद जकरिया मौजूद थे.
विभाग के 25 साल होने पर वेबसाइट लांच
करीम सिटी कॉलेज के मास कम्युनिकेशन विभाग के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर एक वेबसाइट लांच की गई. विभाग के पूर्व छात्र और अब विजिटिंग फैकल्टी तन्मय सिंह सोलंकी ने इसे बनाया है.
विभागाध्यत्र और कार्यक्रम की संयोजिका डॉ.नेहा तिवारी ने सभी विशेष सत्र का संचालन और प्राचार्य डॉ.मोहम्मद रेयाज ने अतिथियों का स्वागत किया और इस संगोष्ठी के सफल आयोजन के लिए सबको बधाई दी. मौके पर गौतम शंकर दास , आकाशवाणी जमशेदपुर के राजीव रंजन और शाहिद अनवर भी उपस्थित थे.


