
उदित वाणी, जमशेदपुर: एलबीएसम कॉलेज के स्नातक उर्दू विभाग की ओर से मंगलवार को विभागीय व्याख्यान का आयोजन किया गया. इसका विषय झारखंड के अहम अफसाना निगार था.
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य अशोक कुमार झा ने कहा कि अफसाना फारसी मूल का शब्द है, जिसका अनुवाद कहानी, कथा, लघु कथा आदि के रूप में किया जाता है. उर्दू साहित्य के लिए इस शब्द का प्रयोग अक्सर अर्थ के विभिन्न रंगों को बोलने के लिए किया जाता है. उर्दू अदब की भाषा है. उन्होंने कहा कि प्रेमचंद उर्दू जबान व अदब के प्रेमी व आशिक थे.
उनकी अफसानों में ये चीजें साफ झलकती थी. मुख्य वक्ता डॉ. अफसर काजमी ने कहा कि प्रेमचंद उर्दू के पहले अफसाना निगार हैं, जिन्हें उर्दू अफसानो का बाबा आदम कहा जाता है.
अफसाना की उम्र 100 वर्ष के लगभग है। इन वर्षों में अफसानों ने बहुत उतार-चढ़ाव देखे हैं, लेकिन प्रेमचंद ने 30-35 वर्षों में कफन जैसा शाहकार अफसाना लिखा. झारखंड के अहम अफसाना निगार में ग्यास अहमद गद्दी, जकी अनवर, गुरु वचन सिंह, शीन अख्तर, अख्तर यूसुफ, इलियास अहमद गद्दी, कहकशा परवीन, नियाज अख्तर और अख्तर आजाद के अफसानों पर भरपूर रोशनी डाली.
कार्यक्रम की संयोजक एवं उर्दू विभाग की प्रोफेसर डॉ. शबनम परवीन ने मंच का संचालन किया. स्वागत भाषण निमी परवीन तथा धन्यवाद ज्ञापन छात्रा नाज़िश ने दिया. मौके पर डॉ. प्रशांत, प्रो. मोहन साहू, डॉ. सुधीर सुमन, प्रो. प्रमिला किस्कू, डॉ. नूपुर, प्रो. सलोनी रंजन तथा छात्र-छात्राएं उपस्थित थे.

