
उदित वाणी, जमशेदपुर: मणिपाल टाटा मेडिकल कॉलेज (MTMC) ने 26 मई को एक समावेशी, सुरक्षित और सम्मानपूर्ण कार्यस्थल के निर्माण के अपने निरंतर प्रयासों के तहत POSH (कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की रोकथाम) पर एक व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया. इस कार्यक्रम में कॉलेज के 300 से अधिक शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया.
POSH अधिनियम की जानकारी और संवेदनशीलता का विकास
कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य था 2013 के “महिलाओं के कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम” को लेकर कर्मचारियों को संवेदनशील बनाना और उनसे जुड़ी प्रक्रियाओं की समझ विकसित करना. प्रशिक्षण के दौरान कर्मचारियों को यह बताया गया कि किस प्रकार से वे संस्थानिक शिकायत प्रणाली का लाभ लेकर सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित कर सकते हैं.
प्रमुख वक्ता बरनाली चक्रवर्ती ने दिया कानूनी और व्यावहारिक दृष्टिकोण
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता थीं बरनाली चक्रवर्ती (विशेषज्ञ, युवा शक्ति फाउंडेशन), जिन्होंने बातचीत की शैली में POSH अधिनियम के कानूनी प्रावधानों, वास्तविक केस स्टडीज़ और लिंग-संवेदनशील वातावरण की आवश्यकता पर प्रकाश डाला. उन्होंने आंतरिक शिकायत समिति (ICC) की भूमिका, कार्यप्रणाली और कर्मचारियों के अधिकारों को भी सरल भाषा में समझाया.
पद्मा कुमारी ने साझा की समुदाय आधारित रणनीतियाँ
कार्यक्रम के दूसरे सत्र का नेतृत्व किया पद्मा कुमारी (पद्म शक्ति फाउंडेशन) ने. उन्होंने जागरूकता, सहानुभूति और संस्थागत जवाबदेही के माध्यम से उत्पीड़न की रोकथाम पर जोर दिया. उनके सत्र में ‘दर्शक हस्तक्षेप’, सम्मान की संस्कृति, और अनुचित व्यवहार की पहचान व उससे निपटने की व्यावहारिक रणनीतियाँ भी शामिल रहीं.
POSH: कानूनी आवश्यकता से आगे, एक नैतिक जिम्मेदारी
कार्यक्रम में यह स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया कि POSH केवल एक कानूनी बाध्यता नहीं है, बल्कि यह कार्यस्थल पर नैतिकता, गरिमा और समानता को सुनिश्चित करने का एक प्रभावी माध्यम भी है. MTMC ने इस कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया कि संस्थान ऐसी पहलों के जरिये न केवल कर्मचारियों को सशक्त बनाना चाहता है, बल्कि वह एक आदर्श और न्यायसंगत कार्य वातावरण के लिए दृढ़प्रतिज्ञ है.

