
उदित वाणी, जमशेदपुर: लाल बहादुर शास्त्री मेमोरियल कॉलेज के स्नातक मनोविज्ञान विभाग की ओर से विभागीय व्याख्यान का आयोजन किया गया. व्याख्यान का विषय ‘ प्रत्यक्षीकरण का अर्थ, सिद्धांत और प्रभावित करने वाले कारक’ था.
व्याख्यान की अध्यक्षता कर रहे प्राचार्य डॉ अशोक कुमार झा ने प्रत्यक्षीकरण के संदर्भ में कहा कि यह ज्ञान की दूसरी सीढ़ी हैं. प्रत्यक्षीकरण मस्तिष्क की गतिविधि हैं यह एक ऐसा मानसिक प्रत्युत्तर होता हैं, जो वातावरण में परिवर्तन के कारण उत्पन्न होता हैं. जब भी मनुष्य के मस्तिष्क में किसी वस्तु, व्यक्ति या क्रिया के प्रति संवेदना उत्पन्न होती है तो मनुष्य के मस्तिष्क में उस वस्तु, व्यक्ति या क्रिया से संबंधित पूर्व अनुभव जागृत होता है तथा उस पूर्व अनुभव के आधार पर मस्तिष्क उसे एक अर्थपूर्ण रूप में स्वीकारता है.
उन्होंने प्रत्यक्षीकरण में समग्रता को लेकर कहा कि हम वस्तु के विभिन्न भागों को अलग-अलग नहीं देख कर उसको संगठित समग्र अथवा पूर्ण वस्तु के रूप में देखते हैं.
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि हम मोटर बाइक को एक पूर्ण वस्तु के रूप में देखते हैं, न कि विभिन्न भागों जैसे- सीट, पहिया तथा हैंडल के एक संग्रह के रूप में. मुख्य वक्ता डॉ. पुष्कर बाला (सहायक प्राध्यपक, मनोविज्ञान विभाग, बीडीएसएल महिला कॉलेज, घाटशिला) ने कहा कि, प्रत्यक्षीकरण संवेदना के पूर्व अनुभव पर आधारित होती है.
प्रत्यक्षीकरण के अंतर्गत हम किसी उद्दीपक का पूर्ण रूप में अनुभव करते हैं. प्रत्यक्षीकरण एक उच्च मानसिक प्रक्रिया है जिसकी सहायता से हम विभिन्न उद्दीपक के मध्य विभेदीकरण कर सकते हैं.
उन्होंने प्रत्यक्षीकरण के गेस्टाल्ट सिद्धांत तथा व्यवहारवादी सिद्धांत का तथा साथ ही प्रत्यक्षीकरण के कारकों की भी व्याख्या की. मंच संचालन मनोविज्ञान विभाग के प्रो. प्रमिला किस्कू ने किया उन्होंने ने भी प्रत्यक्षीकरण के बारे में बच्चो को जानकारी दी. उन्होंने कहा कि प्रत्यक्षीकरण स्पष्ट तथा साथ ही यह अर्थपूर्ण होती है.
धन्यवाद ज्ञापन डॉ. प्रशांत (मनोविज्ञान विभाग, एलबीएसएम महाविद्यालय) ने किया. इस व्याख्यानमाला ऋतु, डॉ. सुधीर सुमन, मोहन साहू तथा डॉ. कुमारी रानी व बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे.

