
उदित वाणी, रांची: 15 नवंबर को राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर मोराहाबादी मैदान में आयोजित मुख्य समारोह में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन चार नई योजनाओं व तीन नई पॉलिसियों की सौगात देंगे.
मुख्यमंत्री इस समारोह में सीएम सारथी योजना, गुरुजी क्रेडिट कार्ड योजना, मुख्यमंत्री शिक्षा प्रोत्साहन योजना व एकलव्य स्किल स्कीम योजना का शुभारंभ करेंगे और इंडस्ट्रियल पार्क एंड लॉजिस्टिक पॉलिसी-2022, इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी-2022 व झारखंड एथेनॉल प्रोडक्शन प्रमोशन पॉलिसी-2022 को लांच करेंगे.
इस अवसर पर लगभग पांच हज़ार करोड़ रुपए से ज्यादा की योजनाओं का होगा उद्घाटन व शिलान्यास करेंगे तथा लाभुकों के बीच 2000 करोड़ रुपए से ज्यादा की परिसंपत्तियों का वितरण करेंगे समारोह में 1000 से ज्यादा नव चयनितों के बीच नियुक्ति पत्र वितरण करेंगे. इस अवसर पर मुख्यमंत्री राहत योजना के पोर्टल की भी लॉन्चिंग करेंगे.
मुख्य समारोह अपराह्न 3 बजे से शाम 6 बजे तक तीन घंटे तक चलेगा. जिसमें राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगी.
मुख्यमंत्री ने शनिवार को झारखंड राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित होनेवाले कार्यक्रमों एवं राष्ट्रपति के आगमन को लेकर की जा रही तैयारियों की वरीय अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की तथा समारोह के मिनट टू मिनट कार्यक्रम की जानकारी लेते हुए अहम निर्देश दिए.
उन्होंने कहा कि सभी तैयारियां ससमय पूरी हो जानी चाहिए। आयोजन स्थल पर सारी व्यवस्थाएं दुरुस्त रहे. सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हो और कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों की सहूलियत का भी ध्यान रखा जाय। समारोह में झारखंड की कला संस्कृति, गीत संगीत व नृत्य पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे.
11 को देंगे 1932 का खतियान व ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण
इधर रामगढ़ में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि 11 नवंबर को उनकी सरकार राज्य के लोगों को 1932 के खतियान आधारित स्थानीय नीति और अन्य पिछड़ा वर्ग [ओबीसी] को 27 फीसदी आरक्षण की सौगात देंगे.
उन्होंने कहा कि झामुमो, कांग्रेस व राजद की सरकार द्वारा 11 नवंबर को बिशेष सत्र आयोजित की जा रही है. इस सत्र में 1932 के खतियान आधारित स्थानीयता व ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण देने संबंधी बिल को पास कराया जायेगा.
इस अवसर पर उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि राज्य में सिर्फ सरकार के मंत्रियों व सत्तापक्ष के विधायकों के यहां छापे पड़ रहे हैं. जैसे विपक्ष के विधायक और नेता दूध के धुले हुए हैं.

