
उदित वाणी, रांची: नियोजन नीति के बाद अब राज्य में ओबीसी आरक्षण का मुद्या गरमाया. जिला स्तरीय पदों पर की जानेवाली नियुक्ति के लिए जारी की गई जिलावार आरक्षण रोस्टर में पश्चिम सिंहभूम समेत कई जिलों में ओबीसी आरक्षण शून्य किया गया है.
इससे ओबीसी समुदाय में काफी आक्रोश व्यक्त किया गया. सोमवार को यह मुद्या राज्य विधानसभा में भी उठा. स्पीकर रबीन्द्रनाथ महतो ने सोमवार को जैसे ही सदन की कार्यवाही प्रारम्भ की भाजपा के खूंटी के विधायक नीलकंठ सिंह मुण्डा ने इस मुद्ये को उठाते हुए जानकारी दी कि राज्य सरकार द्वारा जिला स्तरीय पदों के लिए आरक्षण रोस्टर जारी कर दिया गया है.
लेकिन सरकार द्वारा पश्चिम सिंहभूम, खूंटी, गुमला, लातेहार, लोहरदगा व दुमका जिले में ओबीसी आरक्षण शून्य कर दिया गया है. वहीं बताया गया कि इसके अलावा पूर्वी सिंहभूम, रांची, साहिबगंज, पाकुड़, हजारीबाग व गोड्डा समेत अन्य जिलों में ओबीसी को आबादी के अनुसार आरक्षण नहीं दिया गया है.
जो ओबीसी समुदाय के प्रति घोर अन्याय है. वहीं आजसू सुप्रीमो सुदेश कुमार महतो ने कहा कि जबतक ओबीसी का आरक्षण 27 प्रतिशत नहीं किया जायेगा, समस्या का समाधान नहीं होगा.
उन्होंने कहा कि जबकि ओबीसी आरक्षण बढ़ाने के लिए राज्य सरकार को जातीय जनगणना व ट्रिपल टेस्ट कराने होंगे. राज्य सरकार द्वारा इस पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं की जा रही है. इधर ओबीसी सदान मोर्चा ने कहा कि ओबीसी का आरक्षण नहीं दिया जाना ओबीसी के अधिकारों का हनन है और यह बिल्कुल असंवैधानिक है. राज्य सरकार अपने निर्णय पर पुनर्विचार करे.
मूलवासी सदान मोर्चा के नेता राजेन्द्र प्रसाद ने कहा कि 21 मार्च को ओबीसी आरक्षण व नियोजन नीति को लेकर मोर्चा द्वारा आंदोलन की भी घोषणा की जायेगी.
वनांचल आंदोलनकारियों को भी मिलेगा सम्मान
विधानसभा में भाजपा विधायक विरंची नारायण ने प्रश्नकाल के दौरान सवाल उठाते हुए मांग की कि राज्य में वनांचल आन्दोलनकारियों व जेपी आंदोलनकारियों को भी झारखंड आंदोलनकारियों की तरह सम्मान मिलना चाहिए.
लेकिन झारखंड आंदोलनकारी चिन्हितिकरण आयोग द्वारा वनांचल आंदोलनकारियों को आंदोलनकारियों की सूची में शामिल नहीं किया जा रहा है. इसके जबाब में संसदीय कार्य मंत्री आलमगीर आलम ने कहा कि जेपी आंदोलन एक अलग आंदोलन है. जिसका झारखंड आंदोलन से कोई लेना देना नहीं है.
लेकिन वनांचल आंदोलन भी झारखंड को अलग राज्य बनाने के लिए किया गया था और वनांचल आंदोलन के आंदोलनकारी भी झारखंड आंदोलनकारी माने जायेंगे. आलमगीर ने कहा कि वनांचल आंदोलनकारियों को भी प्रोत्साहन राशि, पेंशन व सम्मान दिया जायेगा.
वहीं संसदीय कार्यमंत्री ने सदन को जानकारी दी कि आंदोलनकारियों को चिन्हित करने के लिए सेवानिवृत्त एक आईएएस अधिकारी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय झारखंड आंदोलनकारी चिह्नितिकरण आयोग का गठन कर दिया गया है. जिसका कार्यकाल 13 जुलाई 2024 तक विस्तारित है.
अगले साल तक किया जायेगा ग्राउंड वाटर बोर्ड का गठन
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के मंत्री मिथिलेश ठाकुर ने कहा कि राज्य में अगले बर्ष तक ग्राउंड वाटर बोर्ड का गठन कर दिया जायेगा और राज्य में भूगर्भ जल स्तर को बरकरार रखने के लिए रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का भी सख्ती से पालन कराया जायेगा.
विधायक प्रदीप यादव के अल्पसूचित प्रश्न का जबाब देते हुए विभागीय मंत्री ने कहा कि राज्य भूगर्भ जल अधिनियम बनाने के लिए भी कार्रवाई प्रक्रियाधीन है. जिसके लागू होने के बाद भू-जल दोहन को प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सकेगा. वहीं उन्होंने कहा कि राज्य में डीप बोरिंग पर रोक लगाई गई है और मकान का नक्शा पास कराने में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग पर जोर दिया जाता है.
तृतीय श्रेणी के समतुल्य वेतन पानेवाले को मिलेगा तृतीय श्रेणी के पदों पर प्रोन्नति
बरकटठा के निर्दलीय विधायक अमित यादव के अल्पूसूचित प्रश्न के जबाब में संसदीय कार्यमंत्री आलमगीर आलम ने कहा कि राज्य में 10-12 बर्षों से कार्यरत चतुर्थवर्गीय कर्मियों, जिन्हें तृतीय श्रेणी के समतुल्य वेतन मिल रहा है. उन्हें जल्द तृतीय श्रेणी के पदों पर प्रोन्नति दी जायेगी. उन्होंने कहा कि प्रोन्नति नहीं मिलना गंभीर बात है. इस मामले में वे नियमावली देखकर इसकी पहल करेंगे.

