
उदित वाणी, जमशेदपुर : सीएसआइआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला जमशेदपुर में मुख्य वैज्ञानिक तथा सलाहकार प्रबंधन के रूप में कार्य करने वाले डॉ अरविंद सिन्हा 31 जनवरी 2023 को रिटायर हुए. 30 वर्षों के लंबे कालखंड तक इन्होंने राष्ट्र के विकास हेतु अपनी वैज्ञानिक सेवाएं देश को प्रदान की. वे वैज्ञानिक तथा नवोन्मेषी अनुसंधान अकादमी भारत सरकार में प्रोफेसर के पद पर भी कार्यरत हैं. डॉ.सिन्हा ने बताया कि उनकी प्रारंभिक शिक्षा मेरठ उत्तर प्रदेश, आईआईटी रुड़की से एम.फिल एवं आईआईटी बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से पीएचडी छात्र के रूप में हुई है. बकौल डॉ.सिन्हा, मैंने भारतवर्ष में पहली बार बायोमिमेट्रिक नैनो मेटेरियल्स पर गहन शोध कार्य किया हूं. मैंने विश्व के कई विश्वविद्यालयों एवं शोध संस्थानों में अपने व्याख्यान दिए हैं. मेरे इस कार्य को लेकर कई राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है. वर्ष 1999 में सीएसआईआर का युवा वैज्ञानिक पुरस्कार प्रदान किया गया. वर्ष 2005 में अल्टेकर पुरस्कार तथा वर्ष 2006 में रमन फैलोशिप प्रदान की गई. कई वैज्ञानिक संस्थानों का फेलो भी मनोनीत किया गया है.
चार टेक्नोलॉजी देश को समर्पित
डॉ.सिन्हा की चार प्रौद्योगिकी देश को समर्पित की जा चुकी है तथा तीन का वाणिज्यिक उत्पादन हो रहा है. उन्होंने द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज (नासी), झारखंड के अध्यक्ष के रूप में कार्य करते हुए झारखंड और बिहार के विश्वविद्यालयों एवं स्कूल के छात्रों में वैज्ञानिक रुचि पैदा करने में काफी सफलता प्राप्त की है. इस बैनर के तले अनेकों कार्यक्रमों का संचालन किया गया है. इन्होंने कई पीएचडी छात्रों का मार्गदर्शन भी किया है.
संस्थान के दी विदाई
इनके विदाई समारोह में एनएमएल के वैज्ञानिकों ने कहा कि विज्ञान के क्षेत्र में इनके अपरिसीम योगदान को देश हमेशा याद रखेगा और आने वाली कई पीढ़ियां इन के पद चिन्हों पर चलते हुए राष्ट्र के लिए कुछ बेहतर करने की प्रेरणा पाती रहेंगी. इन्होंने इसरो के प्रथम पुनर्प्राप्त अंतरिक्ष कैप्सूल में सफलतापूर्वक नैनो मैटेरियल्स का निर्माण करके देश में जमशेदपुर स्थित इस प्रयोगशाला का नाम बुलंदियों के शिखर पर पहुंचाया है. डॉ.अरविंद सिन्हा ने अपनी सफलता का सारा श्रेय अपने श्रद्धेय गुरुदेव स्वर्गीय पी रामचंद्र राव तथा अपनी प्रयोगशाला के सभी टीम सदस्यों को समर्पित किया.

