
उदित वाणी, जमशेदपुर: राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (एनएमएल) अपने तकनीकी नवाचारों और उपलब्धियों को प्रदर्शित करने के लिए 24-28 अप्रैल के दौरान एक सप्ताह, एक लैब अभियान का आयोजन कर रही है.
सीएसआईआर-एनएमएल वन वीक वन लैब कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य उद्योगों की जरूरतों की पहचान करना और वैज्ञानिक समाधान प्रदान करना है. सत्र के पहले भाग में डॉ. इंद्रनील चट्टोराज, पूर्व निदेशक, सीएसआईआर-एनएमएल ने इस्पात निर्माण में हाइड्रोजन पर एक व्याख्यान दिया.
उन्होंने इस्पात उद्योग में हाइड्रोजन के आर्थिक रूप से व्यवहार्य होने से पहले इस विषय पर शोध बढ़ाने पर जोर दिया. आईओसीएल के अरविंद कुमार ने “क्रॉस-कंट्री पाइपलाइन के माध्यम से एचटू मिश्रित एनर्जी और शुद्ध एचटू का परिवहन – चुनौतियां और अवसर” पर अपनी बात रखी.
उन्होंने हाइड्रोजन के परिवहन के क्षेत्र में भारतीय अनुसंधान एवं विकास की वर्तमान स्थिति और देश के सामने आने वाली मौजूदा चुनौतियों पर प्रकाश डाला. परमजीत सिंह, इस्पात मंत्रालय ने स्टील क्षेत्र के डीकार्बराइजेशन पर अपना विचार रखा और मंत्रालय के “मिशन ग्रीन स्टील” के बारे में बात की. इसका उद्देश्य 2030 तक स्टील उद्योग को डीकार्बोनाइज करना है.
टेक्नोलॉजी चैलेंज हैकथॉन की विजेता बनी टाटा स्टील की टीम
कार्यक्रम के तीसरे आईटीआई, डिप्लोमा, यूजी, पीजी, पीएचडी और उद्योगों के छात्रों, शोधकर्ताओं और टेक्नोक्रेट्स के लिए “टेक्नोलॉजी चैलेंज हैकथॉन” का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य बड़े पैमाने पर समाज तक पहुंच बनाना है.
औद्योगिक समस्या समाधान (आईपीएस) प्रतियोगिता में लगभग 11 टीमों को अंतिम दौर की प्रस्तुति के लिए चुना गया था. भाग लेने वाली टीमों द्वारा टाटा स्टील, जिंदल स्टील, सेंट गोबेन और सीएसआईआर एनएमएल आर एंड डी परियोजनाओं से प्राप्त समस्याओं को हल करने का प्रयास किया गया.
प्रतिभागियों ने फेरोलॉयज, स्टील बनाने, औद्योगिक और ई-वेस्ट प्रबंधन और खनिज प्रसंस्करण पर समस्याओं के लिए विस्तृत विचार और समाधान प्रस्तुत किए. वरिष्ठ वैज्ञानिकों का पैनल डॉ. संजय अग्रवाल, डॉ. गणेश चलवडिया और ललित कुमार मीणा ने टीमों के साथ बातचीत की.
टाटा स्टील के सोवन कुमार पात्रा और यशराज कनस्कर को समस्या के समाधान के लिए प्रथम पुरस्कार मिला. एनएमएल के अधिराज कनरार और संबित त्रिपाठी को “पानी की खपत को कम करने के लिए सतत कास्टिंग संचालन में एआई आधारित नोजल का उपयोग” समस्या के समाधान के लिए प्रतियोगिता में दूसरा पुरस्कार मिला.
एनएमएल के ही संबित त्रिपाठी और शुभेंदू चटर्जी को “फेरोलॉय प्रोसेसिंग में ऊर्जा की खपत को कम करने के लिए एमएनओआर की कमी” में माइक्रोवेव का उपयोग करने के लिए तीसरे पुरस्कार से सम्मानित किया गया.
हाइड्रोजन की चुनौतियों पर मंथन
इसके अलावा एनएमएल ने “हाइड्रोजन युग को अनलॉक करने में सामग्री की चुनौतियां” विषय पर आधे दिन की कार्यशाला का आयोजन किया. जहाज और पाइपलाइन द्वारा हाइड्रोजन अणुओं के परिवहन से जुड़ी कई चुनौतियाँ हैं, अर्थात् द्रवीकरण के लिए आवश्यक उच्च-ऊर्जा इनपुट निर्यातकों के लिए महंगा है.
कार्यशाला का उद्देश्य केवल गैसीय हाइड्रोजन के भंडारण और परिवहन के लिए सामग्री पर ध्यान केंद्रित करना है. डॉ. अवनीश कुमार श्रीवास्तव, निदेशक सीएसआईआर-एनएमएल ने अपने स्वागत भाषण में कार्यशाला के उद्देश्य और समाज के विकास के लिए हाइड्रोजन ऊर्जा के महत्व के बारे में जानकारी दी. कुल आठ तकनीकी व्याख्यान प्रख्यात उद्योग विशेषज्ञों द्वारा प्रस्तुत किए गए.


