
उदित वाणी,जमशेदपुर: एमजीएम मेडिकल कॉलेज अस्पताल में जन्म–मृत्यु निबंधन से जुड़े वर्षों पुराने लंबित मामलों पर आखिरकार तेजी दिखने लगी है। जिले के उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी के लगातार निर्देश और सख्त निगरानी के बाद अस्पताल प्रबंधन अब पूरी तरह सक्रिय हो गया है।
पिछले एक सप्ताह के भीतर करीब 600 बैकलॉग मामलों का निष्पादन कर दिया गया है, जो बीते 6–7 वर्षों से लंबित पड़े थे। इन मामलों को लेकर आवेदकों को बार-बार अस्पताल कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ता था, जिससे उन्हें समय और आर्थिक दोनों तरह की परेशानी झेलनी पड़ती थी।
अब न केवल पुराने लंबित मामलों का समाधान हो रहा है, बल्कि नए आवेदनों का निष्पादन भी उसी दिन (सेम डे) किया जा रहा है। इससे आने वाले समय में जन्म–मृत्यु प्रमाण पत्र से जुड़ा कोई भी कार्य लंबित नहीं रहेगा।
अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. जुझार माझी की निगरानी में कर्मचारियों से लगातार कार्य लिया जा रहा है और व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार देखा जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, जैसे ही बैकलॉग वाले प्रमाण पत्रों का आवेदन ऑनलाइन अपलोड हो रहा है, संबंधित आवेदकों के मोबाइल पर मैसेज भेजा जा रहा है। इससे वर्षों से लंबित काम पूरा होने की सूचना सीधे उन्हें मिल रही है। सबसे बड़ी राहत यह है कि अब प्रमाण पत्र लेने के लिए डिमना स्थित अस्पताल आने की आवश्यकता नहीं होगी।
आवेदक किसी भी प्रज्ञा केंद्र से अपना जन्म या मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त कर सकते हैं। जबकि पहले इस तरह की व्यवस्था नहीं थी। इस नई व्यवस्था से न सिर्फ आम लोगों को अनावश्यक भागदौड़ से मुक्ति मिलेगी, बल्कि कर्मचारियों पर पड़ने वाले अतिरिक्त दबाव और “मिठाई खर्च” जैसी अनौपचारिक परेशानियों पर भी विराम लगेगा। स्पष्ट है कि प्रशासनिक सख्ती और निगरानी से व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव संभव है, जिसका लाभ अब सीधे आम जनता को मिल रहा है।

