
उदित वाणी, जमशेदपुर : डिमना चौक स्थित महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) अस्पताल में रविवार को घटी आत्महत्या की घटना ने न केवल चिकित्सा जगत को हिला दिया, बल्कि पूरे अस्पताल प्रबंधन को भी झकझोर कर रख दिया. चौथी मंजिल से कूदकर एक मरीज ने जान दे दी. इस घटना ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए. घटना के अगले ही दिन, सोमवार को अस्पताल प्रबंधन ने आपात बैठक कर कई अहम फैसले लिए और झारखंड राज्य भवन निर्माण निगम लिमिटेड को सुरक्षा संबंधी सिफारिशें भेजीं.
एमजीएम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के प्रिंसिपल डॉ. दिवाकर हांसदा ने अधीक्षक डॉ. आर.के. मंधान, उपाधीक्षक और अन्य पदाधिकारियों से घटना की पूरी जानकारी लेने के बाद निगम के कार्यपालक अभियंता को पत्र लिखा. उन्होंने पत्र में स्पष्ट किया कि गंभीर रूप से बीमार अथवा मानसिक रूप से अस्वस्थ मरीज अक्सर आत्मघाती कदम उठाने की कोशिश करते हैं. ऐसे मामलों में न सिर्फ अस्पताल प्रबंधन कानूनी उलझनों में फंसता है बल्कि इसकी छवि भी धूमिल होती है. इसी वजह से उन्होंने निगम से मांग की है कि नव निर्मित 500 बेड वाले अस्पताल भवन के प्रथम से सातवें तल तक सभी खिड़कियों पर सुरक्षा की दृष्टि से ग्रिल लगाई जाए. उन्होंने यह भी कहा कि यदि मौजूदा निर्माण प्राक्कलन में इसका प्रावधान नहीं है तो तुरंत नया प्राक्कलन तैयार कर मंजूरी दी जाए.
इसी क्रम में एमजीएम अधीक्षक डॉ. आर.के. मंधान ने भी भवन निर्माण निगम को अलग से पत्र लिखकर अस्पताल में कैदी वार्ड बनाए जाने की मांग की है. उन्होंने कहा कि पुराने साकची अस्पताल परिसर में कैदी वार्ड था, जिसका संचालन जिला प्रशासन करता था. लेकिन नए अस्पताल में ऐसी सुविधा नहीं होने से पुलिस और अस्पताल प्रशासन दोनों को कठिनाई का सामना करना पड़ता है. सुरक्षा दृष्टिकोण से अलग कैदी वार्ड का निर्माण आवश्यक बताया गया है.
साथ ही, मरीजों की गतिविधियों पर सख्त निगरानी की व्यवस्था भी लागू की गई है. डॉ. मंधान ने सभी विभागाध्यक्षों, चिकित्सकों और सिस्टर-इन-चार्ज को निर्देश जारी किए हैं कि यदि कोई मरीज छुट्टी मिलने के बाद दो घंटे तक बेड खाली नहीं करता या भर्ती मरीज बिना बताए एक घंटे से अधिक गायब रहता है तो इसकी तत्काल सूचना होमगार्ड इंचार्ज को दी जाए. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस दौरान लापरवाही होने पर संबंधित चिकित्सक और नर्स-इन-चार्ज को जिम्मेदार ठहराया जाएगा.
इन सख्त कदमों से साफ है कि एमजीएम प्रबंधन अब सुरक्षा को लेकर कोई जोखिम नहीं उठाना चाहता. मरीजों की जान की हिफाजत और अस्पताल की छवि बचाने के लिए खिड़कियों पर ग्रिल, अलग कैदी वार्ड और मरीजों की गतिविधियों पर पैनी नजर जैसी व्यवस्थाएं शीघ्र लागू होंगी.

