
उदित वाणी जमशेदपुर: मानगो नगर निगम चुनाव के दौरान प्रत्याशियों द्वारा जमा किए गए जाति प्रमाण पत्रों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी होने का आरोप लगाए जा रहे हैं। विशेष रूप से ओबीसी -01 वर्ग के लिए आरक्षित वार्डों में जारी प्रमाण पत्रों को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। यदि इन मामलों की गहन जांच होती है तो 10 से अधिक वार्ड पार्षदों की सदस्यता पर भी खतरा मंडरा सकता है।
वार्ड संख्या-11 से चुनाव लड़ चुकी प्रत्याशी अंजू गोराई के पति रवि शंकर गोराई ने शुक्रवार को उपायुक्त सह जिला निर्वाचन पदाधिकारी को पत्र लिखकर वार्ड-11 से विजयी प्रत्याशी सुशीला शर्मा के जाति प्रमाण पत्र को फर्जी बताते हुए इसकी जांच की मांग की है। शिकायत में कहा गया है कि सुशीला शर्मा का मायका बिहार के बिहार शरीफ जिले में है, जबकि उन्होंने पति के आधार पर जाति प्रमाण पत्र बनवा लिया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि संभवतः यह देश का पहला मामला है जिसमें किसी महिला का जाति प्रमाण पत्र पिता के बजाय पति के आधार पर जारी किया गया है। इसके अलावा यह भी बताया गया कि मात्र दो दिनों के भीतर ही जाति प्रमाण पत्र निर्गत कर दिया गया, जबकि नियमानुसार जिन आवेदकों के पास खतियान नहीं होता, उन्हें पांच खतियानधारियों के गवाह के साथ कम से कम 15 दिन का नोटिस अंचल कार्यालय और नगर निगम कार्यालय में देना होता है।
रवि शंकर गोराई ने उपायुक्त कार्यालय, मानगो अंचल कार्यालय और नगर निगम से सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत सुशीला शर्मा द्वारा जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए जमा किए गए सभी दस्तावेजों की जानकारी भी मांगी है। उनके अनुसार उपायुक्त की ओर से मामले की जांच का आश्वासन दिया गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस मामले को लेकर उन पर राजनीतिक स्तर पर समझौते का दबाव बनाया जा रहा है, लेकिन वह शिकायत वापस लेने वाले नहीं हैं। चर्चा है कि अगले कुछ दिनों में अन्य निर्वाचित वार्ड पार्षदों के खिलाफ शिकायत लेकर लोग उपायुक्त कार्यालय पहुंच सकते हैं।
धनबाद में एक मुखिया की सदस्यता हो चुकी है खारिज:
2022 में धनबाद जिले के गोपीनाथडीह पंचायत के मुखिया पद पर निर्वाचित हुए बिजेंद्र कुमार पासवान का निर्वाचन राज्य निर्वाचन आयुक्त के आदेश पर रद्द हो चुका है। उक्त मामले में हाई कोर्ट एवं राज्य निर्वाचन आयोग में शिकायत की गई थी। इसलिए संभव है कि अगर शिकायतकर्ता की शिकायत सही है तो मानगो नगर निगम के चुनाव में विजयी हो चुके प्रत्याशी का निर्वाचन रद्द होने का खतरा रहेगा।

