
उदित वाणी, जमशेदपुर : दक्षिण पूर्व रेलवे के वयोवृद्ध और अनुशासित लोको पायलट श्याम बहादुर आज अपने कर्तव्यपथ से सेवा निवृत्त हो गए। उन्होंने रेलवे में लगभग चार दशकों की बेमिसाल सेवा दी, जिसमें वे पहले “हावड़ा-दुर्ग दुरंतो एक्सप्रेस” के चालक रहे और फिर टाटानगर से हावड़ा के बीच चलने वाली अत्याधुनिक “वंदे भारत एक्सप्रेस” के पहले ड्राइवर के रूप में चुने गए।
श्याम बहादुर की रेल यात्रा केवल एक पेशेवर जिम्मेदारी नहीं रही, बल्कि यह उनके जीवन की एक साधना रही है। रेलवे के लोको पायलटों में उन्हें अत्यंत अनुशासित, तकनीकी रूप से दक्ष और हमेशा सतर्क रहने वाले चालक के रूप में जाना जाता है। उनकी सेवा के दौरान कोई बड़ी दुर्घटना या लापरवाही की घटना दर्ज नहीं हुई, जो उनकी दक्षता और प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
जब वर्ष 2012 में हावड़ा-दुर्ग दुरंतो एक्सप्रेस शुरू हुई, तब श्याम बहादुर को इसके लोको पायलट की ज़िम्मेदारी दी गई थी। तेज रफ्तार और सुपरफास्ट ट्रेन को संभालना एक चुनौतीपूर्ण कार्य था, लेकिन श्याम बहादुर ने उसे पूरी निष्ठा से निभाया।
बाद में जब वर्ष 2023 में झारखंड के लिए पहला वंदे भारत एक्सप्रेस टाटानगर से हावड़ा के बीच शुरू हुआ, तो श्याम बहादुर को इसकी पहली संचालन टीम में शामिल किया गया। रेलवे अधिकारियों का मानना था कि ऐसे आधुनिक सेमी-हाईस्पीड ट्रेन के लिए किसी अनुभवी और भरोसेमंद लोको पायलट की आवश्यकता है, और श्याम बहादुर इसके लिए सर्वश्रेष्ठ विकल्प थे।
आज उनके सम्मान में रेलवे कर्मचारियों द्वारा एक सादगीपूर्ण विदाई समारोह आयोजित किया गया। इस मौके पर सहकर्मियों ने उनके साथ बिताए लम्हों को याद किया और कहा कि वे एक प्रेरणास्रोत हैं।
सेवानिवृत्ति के बाद श्याम बहादुर ने कहा, “मैंने रेल को अपना परिवार माना है। आज भावुक हूं, लेकिन संतोष भी है कि मैंने बिना किसी दाग के सेवा पूरी की।”
उनका योगदान न केवल रेलवे के तकनीकी संचालन में था, बल्कि युवा चालकों के लिए मार्गदर्शन और प्रेरणा भी रहे। रेलवे की यह विरासत उनके अनुभव और मूल्यों के साथ हमेशा जीवित रहेगी।

