
उदित वाणी, जमशेदपुर: लाल बहादुर शास्त्री मेमोरियल कॉलेज के स्नातक उर्दू विभाग की ओर से विभागीय व्याख्यान का आयोजन किया गया. व्याख्यान का विषय- “दास्तान का फन और उर्दू दास्तान का इर्तक़ा” था.
व्याख्यान की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य डॉ. अशोक कुमार झा ने कहा कि दास्तान फन की परंपरा अरब से हिदुस्तान में आई और मशहूर हुई. पंडित देवकीनंदन खत्री ने अरब की मशहूर दास्तान ए अमीर हम्ज़ा पर आधारित तिलिस्मी कथा श्रृंखला चंद्रकांता लिखी और इस पुस्तक ने लोकप्रियता हासिल की.
प्रथम मुख्य वक्ता डॉ. शबनम परवीन (सहायक प्राध्यापक, एलबीएसएम कॉलेज, करनडीह, जमशेदपुर) दास्तान फ़ारसी ज़बान का लफ़्ज़ है जिसका अर्थ तवील कहानी है अर्थात दास्तान एक तवील कहानी है जो हक़ीक़ी ज़िन्दगी की बजाए मुहयीउरुलअक़ूल वाक़यात से तॶल्लुक़ रखती हैं. दास्तान में माफ़ौक़ुलफ़ितरत वाक़्यात का एक सिलसिला होता है.
द्वितीय मुख्य वक्ता डा. मोहम्मद ईसा (सहायक प्राध्यापक, पीजी. डिपार्टमेंट ऑफ उर्दू, करीम सिटी कॉलेज, जमशेदपुर) ने कहा कि दास्तान हमारे साहित्य में कहानी का वह प्रारूप है जिसने हमारी पुरानी सभ्यता कथा के रूप में उभरती है और हमें हमारी वास्तविकता की ओर लौटने को आमंत्रित करती है. ये कथाएं हमारे सुनहरे सपनों की तरह होती हैं: आनन्दमयी और सुखदायी.
व्याख्यान श्रंख्ला की संयोजक एवं उर्दू विभाग की प्रोफेसर डॉ. शबनम परवीन ने स्वागत भाषण दी. यूजी प्रथम वर्ष की छात्रा नाज़िश अर्शी ने मंच का संचालन किया तथा धन्यवाद ज्ञापन निमी परवीन सेम 5 की छात्रा ने दिया. इस मौके पर डॉ. प्रशांत, मोहन साहू, प्रमिला किस्कू तथा छात्र-छात्राएं उपस्थित थे.

