
उदित वाणी, जमशेदपुर: लाल बहादुर शास्त्री मेमोरियल कॉलेज के स्नातक मनोविज्ञान विभाग की ओर से विभागीय व्याख्यान का आयोजन किया गया. इसमें सीखने के संप्रत्य और सिद्धांत विषय पर चर्चा की गई.
व्याख्यान की अध्यक्षता कर रहे प्राचार्य डॉ अशोक कुमार झा ने कहा कि सीखना एक व्यापक सतत् एवम् जीवनपर्यन्त चलने वाली प्रक्रिया है. उन्होंने उदहारण देकर सीखने से संबंधित बहुत सारी बातें बच्चों को बताई. उन्होंने कहा कि किसी शिशु को आप पहली बार कोई गर्म दूध से भरी गलास को देंगे तो वह उसे बिना यह जाने की यह गर्म होगा पी लेगा और लेकिन जब आप यही क्रिया अगली बार दोहराएंगे वह अपने पिछले अनुभवों से सीख कर यह जान चुका होगा कि इसे नहीं पीना है.
कहने का तात्पर्य है कि सीखना वह मानसिक क्रिया है जिसमे बालक परिपक्वता और अपने अनुभवों और अभ्यास से अपने स्वाभाविक व्यवहार में परिवर्तन करता है.
मुख्य वक्ता प्रो. पूनम माई तियू ( विभागाध्यक्ष, मनोविज्ञान, बिरसा कॉलेज, खुटी, रांची विश्वविद्यालय, रांची) ने सीखने के सम्प्रत्य और सिद्धांत पर अपनी विचारों को छात्रों के साथ साझा किया. उन्होंने कहा कि अधिगम या सीखना एक सतत या निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है. कहा कि बार -बार अभ्यास करने से मंद बुद्धि व्यक्ति भी कई नई बातें सीख कर उनका जानकार हो जाता है.
मंच संचालन मनोविज्ञान विभाग के डॉ. प्रशांत ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन मनोविज्ञान विभाग के डॉ. प्रमिला किस्कू जी ने किया. इस व्याख्यानमाला में डॉ. शबनम परवीन, डॉ. जया , डॉ. रानी, डॉ. सुधीर सुमन, प्रोफेसर मोहन साहू, तथा साथ ही बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे.


