
उदित वाणी, जमशेदपुर : आदिवासी कुड़मी समाज ने 20 सितम्बर सुबह 5 बजे से दक्षिण-पूर्व रेलवे के विभिन्न स्टेशनों पर अनिश्चितकालीन रेल और सड़क चक्का जाम आंदोलन का आह्वान किया है. समाज की प्रमुख मांग कुड़मी समुदाय को अनुसूचित जनजाति सूची में शीघ्र शामिल करने की है. रेलवे का मानना है कि यह गैर-रेलवे मुद्दा है, लेकिन आंदोलन का सीधा असर ट्रेनों के परिचालन पर पड़ेगा.
रेलवे प्रशासन ने आशंका जताई है कि रेल अवरोध से यात्री और मालगाड़ी दोनों सेवाएं प्रभावित होंगी. इससे कोयला, खाद्यान्न, पेट्रोलियम पदार्थ, उर्वरक, पानी और दवाओं जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बाधित हो सकती है. यात्रियों को भारी परेशानी और रेलवे को बड़े आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है. पूर्व में भी कुड़मी आंदोलन से ट्रेन परिचालन बुरी तरह प्रभावित हुआ था.
इस बीच, कोलकाता हाईकोर्ट ने गुरुवार को बंगाल सरकार और भारतीय रेलवे को निर्देश दिया है कि संयुक्त प्रयासों से सड़क और रेल यातायात को बाधित न होने दिया जाए.
सुरक्षा और एहतियाती कदम
स्थिति से निपटने के लिए दक्षिण-पूर्व रेलवे ने राज्य प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर कई उपाय किए हैं—
प्रभावित स्टेशनों पर क्विक रिएक्शन टीम की तैनाती.
जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों के साथ समन्वय सेल स्थापित.
पटरियों, यार्ड और स्टेशन क्षेत्रों में गश्त तेज.
सोशल मीडिया और खुफिया इनपुट पर निगरानी.
डिवीजन मुख्यालयों पर इमरजेंसी कंट्रोल रूम सक्रिय.
ग्रामीणों और जनता को आंदोलन में शामिल न होने की अपील.
रेलवे ने कुड़मी समाज को लिखित रूप से चेताया है कि रेल अवरोध से कानूनी कार्रवाई होगी और रेलवे सुरक्षा बल को गिरफ्तारी और अभियोजन का अधिकार है.
रेलवे ने साफ कहा है कि गैर-रेलवे मुद्दे पर आंदोलन के बजाय कुड़मी समाज को संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखनी चाहिए. रेल सेवा देश की जीवन रेखा है और इसका बाधित होना जनहित के खिलाफ है.

