
शहरवासियों को पोल्की ज्वेलरी का विशाल रेंज पहली बार देखने को मिलेगा
उदित वाणी, जमशेदपुर: लाइट वेट ज्वेलरी के इस दौर में पोल्की ज्वेलरी की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है. परम्परागत राजवाड़े लूक और इसकी खास डिजाइन ने इसे ट्रेंडी बना दिया है.
बावजूद जमशेदपुर के लोगों में इस ज्वेलरी के बारे में जागरूकता कम है. इस ज्वेलरी के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए डायगनल रो़ड बिष्टुपुर स्थित केशवजी छगनलाल ज्वेलर्स शोरूम में 14 से लेकर 20 अक्टूबर के बीच पोल्की ज्वेलरी की प्रदर्शनी सह बिक्री लग रही है, जिसमें हर तरह के डिजाइन की पोल्की ज्वेलरी को प्रदर्शित किया जाएगा.
केशवजी छगनलाल ज्वेलरी के सिद्धार्थ आदेसरा ने बताया कि गुजरात-राजस्थान में यह ज्वेलरी काफी लोकप्रिय है. लेकिन जमशेदपुर में यह ज्वेलरी कम चलन में है, क्योंकि लोगों को इसके बारे में कम जानकारी है.
इस प्रदर्शनी का मकसद लोगों को पोल्की ज्वेलरी के बारे में जागरूक करना है. यह 14 और 18 कैरेट पर बनता है. यह देखने में रॉयल और हेवी तो लगता ही है, प्योर डायमंड के आभूषणों से सस्ता होता है. शादियों में इसकी बिक्री ज्यादा होती है क्योंकि यह अभी ट्रेंड में है.
क्यों आकर्षक है यह ज्वेलरी
ऐसा क्या होता पोल्की ज्वेलरी में, जो इसे खास और आकर्षक बनाता है? पोल्की हीरे से बने होते हैं और यह स्पेशली हैंड-क्राफ्टेड होते हैं. पोल्की में जो स्टोन इस्तेमाल किए जाते हैं, जिन्हें पोल्की स्टोन्स भी कहते हैं. वास्तव में अनकट, अनफिनिश्ड डायमंड्स होते हैं, जिन्हें सीधे तौर पर माइनिंग से प्राप्त किया जाता है.
इन हीरों को उनकी सबसे नेचुरल फॉर्म में यूज किया जाता है जो पोल्की को एक क्लास प्रदान करते हैं. इसमें हीरों के सुंदर डिजाइन और पैटर्न के बेहद आकर्षक पैटर्न का इस्तेमाल किया जाता है.
कैसे बनाई जाती है पोल्की ज्वेलरी?
पोल्की ज्वेलरी के सेट्स में एक चीज खास होती है, जो अनकट डायमंड होता है. इन पोल्की स्टोन्स को को लाक और महीन शुद्ध सोने की पन्नी का उपयोग करके सोने के आभूषणों में सेट किया जाता है.
सोने की पन्नी पोल्की पत्थरों को एक साथ रखती है और उन्हें अपनी स्थिति में बनाए रखती है. कभी-कभी इनमें रूबी, सफायर, एमेरल्ड्स और अन्य जेम स्टोन्स भी अनकट डायमंड्स के बीच लगाए जाते हैं. यह पोल्की के डिजाइन को और वर्सेटाइल और क्लासी अपील देता है.
रॉयल और रीगल टच
पोल्की ज्वेलरी के सेट्स में एक चीज खास होती है, जो अनकट डायमंड होता है. इन पोल्की स्टोन्स को लाक और महीन शुद्ध सोने की पन्नी का उपयोग करके सोने के आभूषणों में सेट किया जाता है.
सोने की पन्नी पोल्की पत्थरों को एक साथ रखती है और उन्हें अपनी स्थिति में बनाए रखती है. रॉयल और रीगल टच वाली पोल्की ज्वेलरी देखनें में बेहद सुंदर होती है. ऐसा कहते हैं कि कोई भी ब्राइडल जोड़ा एक पोल्की सेट के बिना अधूरा होता है, मगर अब इसे सिर्फ ब्राइडल अटायर के साथ ही नहीं, बल्कि हर आउटफिट के साथ एक्सपेरिमेंट के साथ स्टाइल करते देखा जाता है.
मुगलों द्वारा भारत में लाई गई यह ज्वेलरी
मुगलों द्वारा भारत में लाई गई पोल्की ज्वेलरी, डिजाइन की सबसे पुरानी शैलियों में से एक है. यह भले ही मुगलों के साथ भारत आया हो, लेकिन आज यह भारतीय परंपरा और संस्कृति का एक समृद्ध हिस्सा भी बन गया है.
अनफिनिश्ड नेचुरल डायमंड और स्टोन के रॉ फॉर्म से एक शानदार पोल्की सेट तैयार किया जाता है. हालांकि इसकी पहचान और कीमत कम लोग ही समझ पाते हैं.
कुंदन नहीं है पोल्की
अधिकतर महिलाएं पोल्की और कुंदन को एक समान समझ लेती हैं. मगर कुंदन और पोल्की में बहुत फर्क होता है. सबसे बड़ा फर्क यही है कि पोल्की मुगलों द्वारा प्राप्त है और कुंदन राजस्थानी ज्वे तीन साल बाज अपना शताब्दी समारोह मनाएगा केशवजी छगनलाल ज्वेलर्स
केशवजी छगनलाल ज्वेलर्स की शुरूआत 1925 में हुई थी. तीन साल बाद केशवजी छगनलाल जी अपनी स्थापना का शताब्दी समारोह मनाएगा. वहां सोने के साथ ही हीरे, चांदी और स्टोन्स के आभूषण मिलते हैं.



