
उदित वाणी, जमशेदपुर: भारत और चीन के बीच पांच साल के अंतराल के बाद विशेष प्रतिनिधियों की 23वें दौर की बैठक बीजिंग में हुई. इस बैठक में दोनों देशों के बीच 6 मुद्दों पर सहमति बनी, जिसमें कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू करने पर भी सहमति बनी. भारत और चीन के बीच हुई सहमति के अनुसार, कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू होगी. यह यात्रा हिंदू धर्म के अनुयायियों के लिए विशेष महत्व रखती है, जो तिब्बत में स्थित कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील तक जाती है.
कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील
कैलाश पर्वत को भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है, जिसकी ऊंचाई लगभग 6,638 मीटर है. मानसरोवर झील को लेकर ऐसी मान्यता है कि इसकी रचना ब्रह्मा जी ने की थी, जो तिब्बत के उच्च पठार पर 4,590 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है.
साल 2020 से बंद हो गई थी यात्रा
साल 2020 के बाद से कैलाश मानसरोवर यात्रा के दोनों आधिकारिक रूट भारतीयों के लिए बंद रहे. चीन ने इस यात्रा पर कई पाबंदियां लगाईं, जिनकी वजह से भारतीयों के लिए यह यात्रा करना मुश्किल हो गया. चीन ने कैलाश मानसरोवर यात्रा की फीस तक बढ़ा दी. साथ ही चीन ने यात्रा करने के लिए नियम बेहद सख्त कर दिए.
यात्रा की तैयारी और आवश्यकताएं
कैलाश मानसरोवर यात्रा जून माह में शुरू होती है, लेकिन इसकी तैयारियां जनवरी से ही आरंभ हो जाती हैं. यह यात्रा शारीरिक और मानसिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण मानी जाती है, जिसके लिए तीर्थयात्रियों को अच्छी फिटनेस की आवश्यकता होती है. यात्रा करने वालों की अधिकतम 70 वर्ष होनी चाहिए. बॉडी मास इंडेक्स (BMI) 25 या उससे कम होना चाहिए. यात्रा शुरू करने से पहले शारीरिक रूप से स्वस्थ मेडिकल तौर पर फिट होना चाहिए. साथ ही 6 महीन के लिए वैध भारतीय पासपोर्ट भी होना चाहिए.

