
उदित वाणी, जमशेदपुर : 2023 में शुरू की गई पहल जोहार हाट, जो जमीनी स्तर के जनजातीय कारीगरों, पारंपरिक वैद्यों और घरेलू रसोइयों को उद्यमशीलता के अवसर प्रदान करती है, ने जनवरी 2026 में अपनी तीसरी वर्षगांठ मनाई. पिछले तीन वर्षों में यह मंच जनजातीय आजीविकाओं को बढ़ावा देने के साथ-साथ आदिवासी समुदायों और जमशेदपुर के नागरिकों के बीच सार्थक जुड़ाव का एक जीवंत केंद्र बनकर उभरा है.अपने आरंभ से अब तक जोहार हाट ने 118 समूहों और व्यक्तिगत स्टॉल संचालकों को सहयोग प्रदान किया है, जिससे 17 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों की 29 जनजातियों से जुड़े 378 कारीगरों को सामूहिक रूप से लाभ मिला है. इस पहल के तहत कुल 95.96 लाख की बिक्री दर्ज की गई है और 20,000 से अधिक आगंतुकों ने भागीदारी की है, जो इसकी बढ़ती पहुंच और प्रभाव को दर्शाता है.
5 जनजातियों के 25 प्रतिभागियों ने भाग लिया
14 से 20 जनवरी तक आयोजित तीसरे वर्षगांठ संस्करण का आयोजन मकर संक्रांति के अवसर पर किया गया, जो पूरी तरह झारखंड की जनजातीय विरासत पर केंद्रित था. इस विशेष चक्र में संथाल, हो, उरांव, मुंडा और खरवार- इन पांच जनजातियों के 25 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जहां हस्तशिल्प, वस्त्र, आदिवासी व्यंजन और पारंपरिक उपचार पद्धतियों का प्रदर्शन किया गया.
जनजातीय व्यंजन
कार्यक्रम के दौरान भोजन एक प्रमुख आकर्षण बना रहा. सगुन महिला समिति ने झारखंड के पारंपरिकव्यंजनों की विशेष प्रस्तुति दी, वहीं एसआईएसआई स्वयं सहायता समूह ने रागी आधारित आदिवासी उत्पादों को प्रदर्शित करते हुए सतत और पौष्टिक खाद्य परंपराओं को बढ़ावा दिया. आगंतुकों ने शीतकालीन विशेष व्यंजनों, संक्रांति के पकवानों के साथ-साथ मडवा मोमो और पारंपरिक सूप जैसे लोकप्रिय स्वादों का आनंद लिया.अपने अनुभव साझा करते हुएद ओंग अपैरल की सह-संस्थापक संध्या सिंह ने कहा, “मैं पहली बार सितंबर 2023 में जोहार हाट आई थी और तब से यह मेरे लिए एक बेहद समृद्ध अनुभव रहा है. जोहार हाट को खास बनाने वाली बात यह है कि यहां विभिन्न जनजातियों के कारीगरों से मिलने का अवसर मिलता है, जिनकी अपनी-अपनी अनूठी कला और कहानियां हैं. भाषाई बाधाओं के बावजूद सभी का ग्राहकों से जुड़ने का तरीका प्रेरणादायक है और हर दौरा एक सीखने का अनुभव बन जाता है.”
एक अनूठा मंच है
एक अन्य प्रतिभागी, जमशेदपुर के मानगो की रोमा होरो ने साझा किया: “जोहार हाट एक अनूठा मंच है जहां हमें अपने उत्पाद प्रदर्शित करने और सीधे ग्राहकों से प्रतिक्रिया प्राप्त करने का अवसर मिलता है. इस मंच का हिस्सा बनने के बाद मैं अधिक लोगों तक पहुंचने में सक्षम रही हूं और अपने उत्पादों को व्यापक दर्शकों तक पहुंचा सकी हूं. यह विभिन्न आदिवासी समुदायों के कारीगरों को एक साथ लाता है और हमें अपनी संस्कृति और परंपराओं को साझा करने का अवसर देता है, साथ ही आजीविका कमाने का भी. मैं सभी को जोहार हाट में आने और हमारा समर्थन करने के लिए प्रोत्साहित करती हूं.
जू में भी स्टॉल लगाए गए
वर्षगांठ सप्ताह में प्रतिभागियों के लिए प्रशिक्षण सत्र, बीड ज्वेलरी बनाने की कार्यशालाएं, सोहराई चित्रकला सत्र, आदिवासी खाना पकाने के प्रत्यक्ष अनुभव और पारंपरिक उपचार पद्धतियों पर बातचीत आयोजित की गई, जिससे आगंतुकों को एक गहन सांस्कृतिक अनुभव प्राप्त हुआ. मुख्य स्थल के अलावा अपनी पहुंच को बढ़ाते हुए जोहार हाट के कियोस्क 14 से 18 जनवरी तक टाटा स्टील ज़ूलॉजिकल पार्कमें लगाए गए, जहां चार जनजातियों के कारीगरों ने जूट कलाकृति, आदिवासी वस्त्र, सोहराई चित्रकला, क्रोशिया और कढ़ाई जैसे शिल्प प्रदर्शित किए.18 जनवरी को बिस्टुपुर में आयोजित जैम@स्ट्रिट में भी जोहार हाट के स्टॉल लगाए गए, जहां आदिवासी व्यंजन और हस्तशिल्प को बड़े पैमाने पर शहरी दर्शकों तक पहुंचाया गया.तीन साल पूरे करने के साथ जोहार हाट आदिवासी उद्यमियों को सशक्त बनाने, स्थायी आजीविका को बढ़ावा देने और स्वदेशी संस्कृति की समृद्धि का जश्न मनाने का कार्य जारी रखे हुए है, जिससे आदिवासी समुदायों और जमशेदपुर शहर के बीच संबंधों को मजबूती मिलती है.

