
उदित वाणी, रांची : आज रांची स्थित प्रोजेक्ट भवन में एक अहम बैठक हुई, जिसमें जमशेदपुर से पहुंचे विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों के प्रतिनिधिमंडल ने राज्य की ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह से मुलाकात की. प्रतिनिधियों ने भोजपुरी, मगही, अंगिका और मैथिली जैसी क्षेत्रीय भाषाओं को झारखंड की नियोजन नीति में शामिल किए जाने की मांग को लेकर उन्हें मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा.
प्रतिनिधियों ने रखे विचार, मंत्री ने दिया आश्वासन
बैठक के दौरान प्रतिनिधियों ने राज्य की भाषायी विविधता और सांस्कृतिक पहचान की अहमियत को रेखांकित करते हुए विस्तृत सुझाव प्रस्तुत किए. मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने उन्हें आश्वस्त किया कि राज्य सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है और जल्द ही न्यायसंगत निर्णय लिया जाएगा.
उन्होंने कहा, “महागठबंधन सरकार झारखंड की भाषायी विविधता, सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक सौहार्द की रक्षा एवं संवर्धन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. हमारी कोशिश है कि एक समावेशी और समानतामूलक समाज की नींव मजबूत हो.”
कौन-कौन थे प्रतिनिधिमंडल में शामिल?
इस प्रतिनिधिमंडल में अंतरराष्ट्रीय मैथिली परिषद, मिथिला सांस्कृतिक परिषद विद्यापति परिषद बागबेड़ा, ललित नारायण मिश्रा संस्थान, भोजपुरी कल्चरल सोसाइटी समेत कई प्रतिष्ठित संस्थानों के सदस्य शामिल थे. सभी ने एक स्वर में यह मांग रखी कि झारखंड की नियोजन नीति में उन भाषाओं को स्थान दिया जाए, जो झारखंडवासियों की अस्मिता और पहचान से जुड़ी हैं.

