
उदित वाणी, जमशेदपुर : बागबेड़ा थाना क्षेत्र के नागाडीह में 18 मई 2017 को बच्चा चोरी की अफवाह पर हुए चर्चित हत्याकांड में शुक्रवार को जमशेदपुर कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया। एडीजे-1 विमलेश कुमार सहाय की अदालत ने पांच अभियुक्तों को दोषी करार दिया, जबकि 20 को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया। दोषी पाए गए अभियुक्तों में राजाराम हांसदा, गोपाल हांसदा, रेंगो पूर्ति, तारा मंडल और सुनील सरदार शामिल हैं। अदालत ने इन सभी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 307, 341, 342, 338, 117/149 के तहत दोषी पाया है। अब 8 अक्टूबर को सजा के बिंदु पर सुनवाई होगी।
पीड़ित पक्ष ने की मजबूत पैरवी
पीड़ित परिवार की ओर से वरीय अधिवक्ता सुशील जायसवाल, सुधीर कुमार पप्पू और जगत विजय सिंह ने अदालत में बहस की। मामला बागबेड़ा थाना कांड संख्या-91/2017 पर दर्ज हुआ था, जो मृतक उत्तम वर्मा के परिजनों के बयान पर आधारित है। इसी घटना पर थाना प्रभारी अमिष हुसैन के बयान पर दर्ज कांड संख्या-90/2017 समेत करीब सात संबंधित मामले अब भी न्यायालय में लंबित हैं।
क्या था नागाडीह हत्याकांड
18 मई 2017 की रात नागाडीह में बच्चा चोर गिरोह की अफवाह फैल गई थी। अफवाह से उन्मादी भीड़ ने जुगसलाई नया बाजार निवासी विकास वर्मा, उसके भाई गौतम वर्मा, उनकी दादी रामसखी देवी और बागबेड़ा निवासी गंगेश गुप्ता को बेरहमी से पीट-पीटकर मार डाला था। इस जघन्य घटना ने पूरे राज्य को झकझोर दिया था।
कई आरोपी अब भी फरार
कुल 28 अभियुक्तों में से एक की मौत हो चुकी है, जबकि कुछ को पहले ही रिहा किया जा चुका था। इस मामले में 8 से 10 आरोपी अब भी फरार बताए जाते हैं, जिनमें विभीषण सरदार और जगत मार्डी जैसे नाम शामिल हैं। इनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कार्रवाई जारी है।
आगे की कानूनी लड़ाई
अधिवक्ता सुशील जायसवाल ने कहा कि दोषी पाए गए अभियुक्तों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। वहीं सूचक पक्ष की ओर से अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू ने रिहा किए गए अभियुक्त के विरुद्ध इस फैसले को चुनौती देने के लिए हाई कोर्ट जाने की बात कही जा रही है। अब सभी की निगाहें 8 अक्टूबर पर टिकी हैं, जब अदालत दोषियों को सजा सुनाएगी।
यह फैसला न सिर्फ नागाडीह कांड के पीड़ित परिवारों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि भीड़तंत्र की मानसिकता और समाज में फैली अफवाहों के खिलाफ भी एक बड़ा संदेश माना जा रहा है।

