
उदित वाणी, जमशेदपुर : “नौकरी दिलवाएंगे… बस 25 हज़ार दीजिए और फिर चमकदार भविष्य आपका होगा.” इसी लालच और झांसे में सैकड़ों बेरोजगार युवा फंसते चले गए. परसों तक जो युवक-युवतियां अंधेरे में कैद थे, कल पुलिस की बड़ी कार्रवाई के बाद आज़ाद होकर खुले आसमान में सांस ले सके.
पूर्वी सिंहभूम पुलिस को मिली गुप्त सूचना पर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी घाटशिला के नेतृत्व में विशेष टीम ने मझगांव ओपी और घाटशिला थाना क्षेत्र में एक साथ छापामारी की. इस दौरान रिया एंटरप्राइजेज नामक फर्जी कंपनी के दफ्तर और उससे जुड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ.
कैसे चलता था गिरोह का खेल?
पुलिस जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए. बेरोजगार युवाओं को “प्राइवेट कंपनियों और विदेशी कॉल-सेंटर में मोटी सैलरी वाली नौकरी” का लालच दिया जाता. पहला कदम था—25,000 रुपये की ठगी. इसके बाद उन्हें दबाव बनाकर और युवाओं को नेटवर्क में जोड़ने के लिए मजबूर किया जाता. जो मना करते, उनके साथ मारपीट होती, डराया-धमकाया जाता और यहां तक कि उन्हें घर जाने से भी रोका जाता.
कुछ युवकों को तकनीकी काम सिखाकर दिन-रात नेटवर्क मॉनिटरिंग और फर्जी डेटा एंट्री कराई जाती. कई युवतियां मानसिक उत्पीड़न की शिकार हुईं. यह पूरा रैकेट मल्टी-लेवल मार्केटिंग और नेटवर्किंग की आड़ में बेरोजगारों को फंसाने का धंधा कर रहा था.
179 युवक-युवतियां मुक्त
छापेमारी के दौरान पुलिस ने 179 युवक-युवतियों को विभिन्न किराए के मकानों और दफ्तर से मुक्त कराया. अधिकांश झारखंड से बाहर—छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और ओडिशा—के रहने वाले थे. कई युवाओं ने बताया कि महीनों से वे अपने घरवालों से संपर्क भी नहीं कर पाए थे.
रायपुर निवासी 22 वर्षीय युवती ने कहा—
“हमें कहा गया था कि यहां से हमें दिल्ली और मुंबई में नौकरी पर भेजा जाएगा. लेकिन एक बार पैसे देने के बाद हम कैद होकर रह गए. फोन छीन लिया गया और बाहर निकलने पर रोक लगा दी गई. पुलिस आई, तभी हमें लगा कि अब हम बच जाएंगे.”
ओडिशा के संबलपुर का 24 वर्षीय युवक बोला—
“मुझसे पहले 25 हज़ार रुपये लिए गए. फिर कहा गया कि दो और लोगों को लाओ, तभी नौकरी मिलेगी. जब मैंने मना किया तो मुझे कमरे में बंद कर दिया गया. पुलिस नहीं आती तो शायद हम कभी घर नहीं लौट पाते.”
गिरफ्तार और फरार अपराधी
कार्रवाई में पुलिस ने मौके से चार आरोपियों को दबोचा—सोमेश कुमार (28), मोहन कुमार राणा, शिवम कुमार सिंह और कुंदन सिंह (34). वहीं, गिरोह का सरगना राजू यादव (गया, बिहार) और उसके सहयोगी सुनील यादव (समस्तीपुर), राहुल रंजन, अनिल और रवि चौहान अब भी फरार हैं. पुलिस की टीमें उनकी तलाश में लगातार छापेमारी कर रही हैं.
कंपनी सील, दस्तावेज जब्त
गिरोह द्वारा संचालित रिया एंटरप्राइजेज का दफ्तर, लालडीह हरीगोड़ में स्थित था. पुलिस ने इसे सील कर दिया है. मौके से बड़ी मात्रा में दस्तावेज, बाउचर और कंप्यूटर जब्त किए गए हैं. इनमें कई राज्यों के युवाओं की लिस्ट, आईडी प्रूफ और लेन-देन के रजिस्टर मिले हैं. जांच से ठगी और नेटवर्किंग की गहरी परतें खुलने की संभावना है.
पुलिस की मेहनत रंग लाई
इस पूरी कार्रवाई का नेतृत्व वंदना नागराज सिंह (थाना प्रभारी, घाटशिला) ने किया. उनके साथ पंकज कुमार (ओपी प्रभारी, मझगांव), अजीत मन्नोज (मझगांव ओपी) और अ.नि. पंकज कार्तिक (घाटशिला थाना) सक्रिय रूप से शामिल रहे.
पुलिस अधीक्षक प्रभारी, पूर्वी सिंहभूम ने कहा—
“अब तक की जांच से साफ है कि यह संगठित गिरोह है, जो बेरोजगारी का फायदा उठाकर युवाओं को ठग रहा था. इसके तार कई राज्यों तक फैले हो सकते हैं. फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष अभियान जारी है.”
मुक्त युवाओं के चेहरे पर लौटी मुस्कान
कई दिनों से कैद जीवन जी रहे युवाओं ने कल लंबी सांस ली. एक मुक्त हुई युवती ने कहा—
“हमें लगा था अब हम कभी घर नहीं जा पाएंगे, लेकिन पुलिस ने हमें बचा लिया. यह हमारे लिए दूसरी ज़िंदगी है.”
दूसरे युवक ने भावुक होकर कहा—
“हम पुलिस को धन्यवाद देना चाहते हैं. उन्होंने हमें समय पर निकाल लिया. अब हम अपने घर लौटकर नया जीवन शुरू करेंगे.”
जमशेदपुर पुलिस की सतर्कता ने सैकड़ों परिवारों को रोने से बचा लिया. बेरोजगारी की समस्या और चमकदार भविष्य के लालच में पड़कर कई युवा ठगी के शिकार हो रहे हैं. यह कार्रवाई न सिर्फ युवाओं को राहत दिलाने वाली है बल्कि ऐसे गिरोहों के लिए भी कड़ा संदेश है कि अपराध चाहे कितना भी संगठित क्यों न हो, कानून से बच पाना आसान नहीं.

