
उदित वाणी, जमशेदपुर : हॉर्टिकल्चरल सोसाइटी, जमशेदपुर द्वारा 13 जुलाई 2025 को एसएनटीआई ऑडिटोरियम में माली और बागवानों के लिए एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई. विषय था — सामान्य बागवानी. यह कार्यशाला नि:शुल्क थी और इसमें शहर के विभिन्न हिस्सों से 70 से अधिक माली शामिल हुए.
दीप प्रज्वलन से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि श्रीमती शैलजा सुंदर रमम द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ. सोसाइटी की अध्यक्ष श्रीमती सुमिता नूपुर ने सभी उपस्थित प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कार्यशाला के महत्व को रेखांकित किया. उन्होंने माली समुदाय की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की विशिष्ट कार्यशालाओं में उनकी भागीदारी प्रेरणादायक है.
“आप बग़ीचे नहीं, शहर का सौंदर्य संवारते हैं” — शैलजा रमम
अपने प्रेरणादायी संबोधन में श्रीमती शैलजा रमम ने कहा कि शहर को हरा-भरा और सुंदर बनाए रखने में माली समुदाय की भूमिका अमूल्य है. उन्होंने उम्मीद जताई कि यह कार्यशाला उनके ज्ञानवर्धन का माध्यम बनेगी और उनकी जिज्ञासाओं का समाधान करेगी. इससे वे और अधिक दक्षता के साथ बग़ीचों का निर्माण एवं रख-रखाव कर सकेंगे.
अनुभवी विशेषज्ञों ने साझा किया ज्ञान
कार्यशाला का संचालन सुश्री ज्योति हांसदा ने किया. उन्होंने वक्ताओं का परिचय कराया —
श्री अनिल कुमार विद्यार्थी, सीनियर हॉर्टिकल्चरिस्ट, टाटा स्टील लिमिटेड
डॉ. धनंजय चौबे, पूर्व मुख्य हॉर्टिकल्चरिस्ट, मि. पलिश्री लिमिटेड एवं वर्तमान में जमशेदपुर एग्री बिजनेस के प्रोप्राइटर
पौधों की देखभाल से लेकर रोग नियंत्रण तक
श्री अनिल विद्यार्थी ने सामान्य बागवानी कौशल विकास विषय पर विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने बताया कि एक अच्छा बग़ीचा विकसित करने के लिए किस प्रकार की कृषि पद्धतियाँ अपनाई जाएं. गमले वाले पौधों की देखभाल, नर्सरी प्रबंधन, उचित मृदा चयन, पौधारोपण तकनीक, जैविक कीट नियंत्रण और सिंचाई जैसे विषयों पर उन्होंने गहराई से प्रकाश डाला.
वहीं, डॉ. चौबे ने पौधों की पहचान और उनके रखरखाव की बारीकियों को समझाया. उन्होंने बताया कि कैसे सिंचाई, उर्वरक प्रयोग, कटाई-छंटाई जैसी गतिविधियों को पौधों की पहचान के अनुसार अंजाम देना चाहिए. उन्होंने माली समुदाय द्वारा की जाने वाली सामान्य गलतियों की ओर भी ध्यान दिलाया, जैसे — अधिक पानी देना, बार-बार गमले बदलना, और उर्वरकों का गलत उपयोग.
सवाल-जवाब और प्रमाणपत्र के साथ समापन
कार्यशाला के अंत में प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों से अनेक जिज्ञासाएँ पूछीं, जिनका दोनों वक्ताओं ने संतोषजनक उत्तर दिया. अंततः सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरित किए गए. कार्यक्रम का समापन सुश्री ज्योति हांसदा के धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने सभी सहभागियों, वक्ताओं और आयोजकों का आभार प्रकट किया.

