
उदित वाणी, जमशेदपुर: भारतीय जनता पार्टी जमशेदपुर महानगर की राजनीति में इस बार एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल रहा है. सोनारी निवासी संजीव सिन्हा का महानगर जिलाध्यक्ष बनना लगभग तय हो चुका है और इसके साथ ही पहली बार सोनारी क्षेत्र से कोई भाजपाई इस शीर्ष संगठनात्मक पद तक पहुंचने जा रहा है.
यह अपने आप में इसलिए भी खास है क्योंकि अब तक सोनारी से कोई भी नेता इस कुर्सी तक नहीं पहुंच पाया था. इससे पहले जब मुकुल मिश्रा भाजपा में सक्रिय थे, तब वे अध्यक्ष बनते-बनते रह गए थे. इसके बाद संगठन में सोनारी की दावेदारी लगातार कमजोर ही मानी जाती रही, लेकिन अब जाकर संजीव सिन्हा को यह अवसर मिला है.
कदमा से अध्यक्ष बने, सोनारी अब तक रहा पीछे
हालांकि सोनारी से सटे कदमा क्षेत्र से पहले ही ब्रह्मदेव शर्मा, नंदजी प्रसाद और सुधांशु ओझा जैसे नेता महानगर अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंच चुके हैं, लेकिन सोनारी संगठनात्मक राजनीति में अब तक इस मामले में पिछड़ा ही रहा था. सोनारी से सिर्फ आभा महतो जरूर भाजपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव जीतने में सफल रही थीं, लेकिन संगठन के स्तर पर क्षेत्र को कभी वह प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया, जिसकी अपेक्षा की जाती रही. वहीं सोनारी के देवेंद्र सिंह भाजपा टिकट पर जमशेदपुर पश्चिम विधानसभा सीट से चुनाव जीतने में असफल रहे थे.
संगठन चुनाव का संकेत: जमशेदपुर पूर्वी का कद घटा
इस बार के संगठन चुनाव का एक दिलचस्प और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि जमशेदपुर पूर्वी को खास तवज्जो मिलती नहीं दिख रही है.
जहां एक ओर महानगर जिलाध्यक्ष की कुर्सी सोनारी के खाते में चली गई है, वहीं प्रदेश प्रतिनिधि के लिए चुने गए छह नामों में एक भी जमशेदपुर पूर्वी से नहीं है. यह संकेत देता है कि पार्टी के अंदरूनी शक्ति संतुलन में बदलाव हो रहा है और संगठन अब नए भौगोलिक व राजनीतिक समीकरणों के साथ आगे बढ़ रहा है.
क्या यह 2029 की तैयारी का हिस्सा है?
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि भाजपा का यह फैसला केवल संगठनात्मक नहीं, बल्कि भविष्य की चुनावी रणनीति का हिस्सा है. सोनारी, मानगो और जुगसलाई जैसे क्षेत्रों में पार्टी अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहती है, जबकि पारंपरिक प्रभाव वाले इलाकों में अब नए नेतृत्व को आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम हो रहा है.
संजीव सिन्हा का अध्यक्ष बनना न सिर्फ सोनारी के लिए सियासी सम्मान की बात है, बल्कि यह भी साफ संकेत है कि भाजपा जमशेदपुर की राजनीति में नया पावर सेंटर तैयार कर रही है. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह बदलाव पार्टी के भीतर शक्ति संतुलन को नए सिरे से परिभाषित करने की कोशिश है. पूर्वी क्षेत्र को महत्व न मिलना कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा और आत्ममंथन का विषय बना हुआ है.
संजीव की ताजपोशी ऐसे समय में हुई है जब संगठन को जमीनी स्तर पर और अधिक एकजुट करने की जरूरत है. उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती जमशेदपुर पूर्वी और पश्चिम के बीच सांगठनिक तालमेल बिठाना और उन कार्यकर्ताओं में जोश भरना होगा जो वर्तमान चयन प्रक्रिया में खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं.
अब देखना यह होगा कि संजीव सिन्हा के नेतृत्व में भाजपा का महानगर संगठन किस दिशा में आगे बढ़ता है और क्या यह बदलाव आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में पार्टी को नया फायदा दिला पाएगा या नहीं.

