
बागबेड़ा सीपी टोला में विडियो बनाने को लेकर झड़प, गाराबासा में एक ही परिवार के चार लोग झड़प में घायल
उदित वाणी, जमशेदपुर : चौथे चरण के चुनाव में कई मतदान केंद्रों से प्रत्याशी के समर्थकों के बीच आपस में झड़प की सूचना मिल रही है. बागबेड़ा गाराबासा प्राथमिक विद्यालयमतदान केंद्र बूथ संख्या 64, 65 में दो प्रत्याशी के समर्थक आपस में भीड़ गए. इस झड़प में एक ही परिवार के चार लोगों के घायल हो गए. बताया जाता है कि कौशल कुमार मंडल व उसका परिवार किसी एक प्रत्याशी के समर्थन में बूथ के बाहर मतदाताओं को मत देने की अपील कर रहा था. स्थानीय महेश सिंह व कन्हैया सिंह ने उन्हें ऐसा करने से मना किया जिसके बाद इनके बीच झड़प शुरु हो गई. झड़प ेमें घायल काजल मंडल ने बताया कि महेश व कन्हैया ने उनपर हमला किया. इसमें कौशल कुमार मंडल, अमिल मंडल, बेबी मंडल भी बुरी तरह से घायल हो गया. मौक पर पुलिस पहुंच कर दोनों गुटे को अलग करवा कर शांत करवाया.
विडियो बनाने को लेकर हंगामा
बागबेड़ा सीपी टोला बूथ में पंचायत समिति प्रत्याशी सोसो देवी और संजय महतो के बीच तू तूू मे मे हो गया. जिसके बाद थोड़ी देर के लिए यहां मतदान प्रभावित हुआ. बताया जाता है कि एक प्रत्याशी के समर्थक के द्वारा चोरी छुपे मतदान देने के दौरान विडियो बनाया जा रहा था जिसको लेकर विवाद की शुरुआत हुई. पुलिस ने दोनों गुट को शांत करवाया.
बागबेड़ा रोड नंबर 4 में हंगामे की खबर सुन ग्रामीण एसपी पहुंचे
इधर बागबेड़ा में रोड नंबर चार में दो प्रत्यासी के बीच हंगामे की सूचना पर ग्रामीण एसपी सदलबल पहुंच कर मुआयना किया. पुलिस के पहुंचने पर हंगामा कर रहे सारे लोग भाग खड़े हुए. यह घटना बूथ संख्या दो की है.
कीताडीह ग्वाला पट्टी में हंगामा
कीताडीह ग्वाला पट्टी में भी मतदान करने को लेकर हंगामा की सूचना है. बूथ नंबर 38, 39 में पूर्व जिला पार्षद के दो समर्थक चुनाव मैदान में हैं. दोनों उम्मीदवार के समर्थकों के बीच हल्की झड़प हुई यहां गोपाल तिवारी नामक व्यक्ति ने जमकर हंगामा काटा. पुलिस के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ.
पोलिंग एजेंट के पास बैठने को लेकर हंगामा
एक बूथ पर पोलिंग ऐजेंट के पास बैठने को लेकर हंगामा हुआ. बताया जाता है कि तालसा पंचायत क्षेत्र में एक बूथ पर कुछ युवक पोलिंग एजेंट के पास बैठे थे इस पर दुसरे गुट के लोगों ने नाराजगी जताते हुए हंगामा किया. उसके बाद वहां से उन युवकों को हटा दिया गया. पहचान पत्र देख कर ही मतदाता को अंदर दिया जाने लगा.
