
उदित वाणी, जमशेदपुर : इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया), जमशेदपुर स्थानीय केंद्र द्वारा 21 फरवरी को एसएनटीआई ऑडिटोरियम, जमशेदपुर में “एक सतत भविष्य के लिए इको-इनोवेशन्स” विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रो. (डॉ.) गौतम सूत्रधार, निदेशक, एनआईटी जमशेदपुर तथा सत्र अध्यक्ष श्री विनीत कुमार साह, चीफ – लॉन्ग प्रोडक्ट्स ने किया. स्वागत भाषण विनीत कुमार साह द्वारा प्रस्तुत किया गया. अपने संबोधन में उन्होंने जलवायु परिवर्तन, तीव्र शहरीकरण, उच्च कार्बन उत्सर्जन, पर्यावरणीय क्षरण तथा अव्यवस्थित विकास जैसी गंभीर पर्यावरणीय चुनौतियों पर प्रकाश डाला. उन्होंने बल दिया कि वर्तमान परिदृश्य में प्रतिक्रियात्मक दृष्टिकोण अब व्यवहार्य नहीं है तथा सतत विकास अनिवार्य हो गया है, जिसमें इंजीनियरों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है.
कार्बन फूटप्रिंट में कमी
मुख्य अतिथि प्रो. (डॉ.) गौतम सूत्रधार ने अपने संबोधन में कहा कि इंजीनियरिंग में स्थिरता का मूल अर्थ परियोजनाओं के दीर्घकालिक पर्यावरणीय एवं सामाजिक प्रभावों को ध्यान में रखना है. इसमें संसाधनों का कुशल उपयोग, अपशिष्ट का न्यूनिकरण, कार्बन फुटप्रिंट में कमी तथा स्वस्थ जीवन-पर्यावरण का निर्माण शामिल है. उन्होंने युवाओं में नवाचार, इन्क्यूबेशन, स्टार्ट-अप्स एवं उद्यमिता को बढ़ावा देने हेतु एनआईटी जमशेदपुर द्वारा किए जा रहे विभिन्न प्रयासों तथा कौशल विकास मंत्रालय, भारत सरकार एवं औद्योगिक साझेदारों के सहयोग से स्थानीय समुदाय के लिए आयोजित कौशल विकास कार्यक्रमों पर भी प्रकाश डाला.
सस्टेनेबल इंजीनियरिंग पर जोर
सस्टेनेबिलिटी इन इंजीनियरिंग: रोल ऑफ इंजीनियर्स इन सस्टेनेबल डेवलपमेंट” विषय पर मुख्य व्याख्यान प्रो. अनिल कुमार चौधरी, प्रोफेसर, सिविल इंजीनियरिंग विभाग, एनआईटी जमशेदपुर द्वारा प्रस्तुत किया गया. उन्होंने सतत इंजीनियरिंग के पांच प्रमुख सिद्धांतों-संसाधनों का कुशल उपयोग, पर्यावरणीय प्रभाव का न्यूनिकरण, सामाजिक उत्तरदायित्व, जीवन-चक्र दृष्टिकोण एवं सहयोगात्मक दृष्टिकोण -पर विशेष बल दिया. साथ ही उन्होंने वर्तमान पर्यावरणीय संकट के कारणों का विश्लेषण करते हुए संभावित समाधान भी प्रस्तुत किए.
इंजीनियरिंग प्रणाली की स्थिरता पर चर्चा
जीआरपी सिंह, हेड – क्वालिटी एश्योरेंस एवं एनालिटिक्स, सेंट्रल प्लानिंग एंड रिसोर्स ग्रुप, टाटा स्टील ने “रोल ऑफ मेंटेनेंस इंजीनियर्स इन प्रमोटिंग सस्टेनेबिलिटी” विषय पर प्रस्तुत किया गया. उन्होंने इंजीनियरिंग प्रणालियों में स्थिरता को बढ़ावा देने हेतु व्यवहार परिवर्तन तथा प्रभावी अनुरक्षण पद्धतियों को अपनाने के महत्व पर बल दिया. डॉ. आलोक कुमार राय, सहायक प्रोफेसर, एनआईटी जमशेदपुर द्वारा “इको-इनोवेशन्स इन थर्मल इंजीनियरिंग: फेज़ चेंज मटेरियल्स फॉर क्लीन एनर्जी एंड इंडस्ट्रियल सस्टेनेबिलिटी” विषय पर प्रस्तुत किया गया. उन्होंने थर्मल इंजीनियरिंग एवं स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में विभिन्न नवाचारों तथा भविष्य की स्थिरता हेतु उनके उपयोग पर प्रकाश डाला.

