
उदित वाणी, जमशेदपुर: झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश संजय कुमार मिश्रा और न्यायाधीश आनंद सेन की बेंच में पीयूसीएल द्वारा दायर पीआईएल रिट (जनहित याचिका) संख्या 3434 – 2019 की सुनवाई मंगलवार को हुई.
पिटीशन में प्रदूषण मानकों का घोर उल्लंघन कर स्पंज आयरन बनाने वाली कंपनियों को बंद करने की मांग की गई है. ये कंपनियां हैं- सिद्धि विनायक मेटकॉम लिमिटेड, नरसिंह इस्पात लिमिटेड, जय मंगला स्पंज आयरन प्राइवेट लिमिटेड, कोहिनूर स्टील प्राइवेट लिमिटेड, जूही इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड, चांडिल इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड, डिवाइन एलॉयज एंड पावर लिमिटेड तथा एम्मार एलॉयज प्राइवेट लिमिटेड.
उच्च न्यायालय ने मानवाधिकारों के घोर उल्लंघन के मद्देनजर एडवोकेट जेनेरल के नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में मामले को भेजने के तर्क को खारिज कर इस संवेदनशील मामले का संज्ञान लिया.
याचिकाकर्ता पीपुल्स यूनियन ऑफ सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) ने चौका, चांडिल और उसके आसपास लगभग 2-3 वर्ग किमी क्षेत्र में स्थित इन 9 कंपनियों के खिलाफ पर्यावरण दिशा-निर्देशों का उल्लंघन कर स्पंज आयरन प्लांट स्थापित करने, ग्रामीणों को पानी से महरूम करने, जमीन की उर्वरता बर्बाद करने, हवा के उत्सर्जन मानदंडों का घोर उल्लंघन कर क्षेत्र को प्रदूषित करने और प्राकृतिक जल धाराओं को दूषित करने के खिलाफ 2019 में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दाखिल किया था.
पीयूसीएल के अधिवक्ता अखिलेश श्रीवास्तव ने खंडपीठ को बताया कि कंपनियों द्वारा पानी के उपयोग के मानदंडों का उल्लंघन कर गहरे बोरिंग के माध्यम से अवैध रूप से भूजल निकाल कर भूजल में अप्रत्याशित कमी करने और जमीन की उर्वरता को नष्ट करने, ठोस और तरल कचरे द्वारा जमीन की उपरी सतह को प्रदूषित कर उसे कृषि के लिए अनुपयुक्त बनाया जा रहा है.
पीयूसीएल के तरफ़ से अधिवक्ता अखिलेश श्रीवास्तव, रोहित सिंह, आकाश शर्मा और मंजरी सिन्हा ने सुनवाई में हिस्सा लिया.

