
झारखण्ड में राष्ट्रीय उच्च पथ के घनत्व को राष्ट्रीय औसत के बराबर लाने के लिए मांगी 1662.50 किलोमीटर के कुल 8 प्रमुख सड़क कॉरिडोर
उदित वाणी, रांची: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से कोऑपरेटिव फेडरलिज्म के सिद्धान्तों को धरातल पर उतारते हुए झारखण्ड को उचित सहयोग प्रदान करने का आगह किया.
उन्होंने कहा कि ताकि विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने में झारखण्ड भी अपनी भागीदारी दर्ज करा सके. मुख्यमंत्री नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित नीति आयोग की शासी परिषद् की 8वीं बैठक में बोल रहे थे. उन्होंने कहा कि विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने एवं झारखण्ड की मूलभूत सरंचना को मजबूत बनाने के लिए सरकार द्वारा सार्थक प्रयास किया जा रहा है.
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए प्रक्रियाओं के सरलीकरण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है. सरकार के प्रयासों से निवेशकों में विश्वास बढ़ेगा और निवेशक प्राकृतिक संपदाओं से परिपूर्ण राज्य में निवेश के लिए प्रोत्साहित होंगे.
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में एमएसएमई क्षेत्र को सुदृढ़ करने के लिए अलग निदेशालय की स्थापना एवं वर्त्तमान जिला उद्योग केन्द्रों को भी जिला एमएसएमई केन्द्र के रूप में विकसित करने की योजना है. राज्य एवं जिला में समन्वय स्थापित करके 2.8 लाख से अधिक पंजीकृत एमएसएमई उद्योगों की जरूरतों को पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है.
इसके अतिरिक्त राज्य में एमएसएमई प्रोत्साहन नीति 2023 और एमएसएमई बिशेष रियायत अधिनियम 2023 का प्रारूप तैयार किया गया है. जिसे शीघ्र लागू किया जायेगा। एमएसएमई सेक्टर में स्थायी पूंजी पर देय पूंजीगत सब्सिडी को 25 प्रतिशत से बढ़ाकर अधिकतम 40 प्रतिशत तक किया जा रहा है.
इसके साथ ही राज्य सरकार एमएसएमई के रैंप कार्यक्रम के तहत स्ट्रेटेजिक निवेश योजना भी तैयार कर रही है. राज्य में वर्तमान लागू खरीद नीति को भी रिवाइज किया जा रहा है. ताकि स्थानीय एमएसएमई को और अधिक महत्व दिया जा सके.
इसके लिए नई पब्लिक प्रोक्योरमेंट पॉलिसी का प्रारूप तैयार किया गया है. जिसे शीघ्र लागू किया जायेगा. इससे समाज के कमजोर वर्गों यथा महिलाएं, अनुसूचित जाति, जनजाति और दिव्यांग उद्यमियों के स्वामित्व वाले उद्योगों को अधिक लाभ मिल सकेगा.
इज ऑफ डूइंग बिजनेस में झारखण्ड रहा है उत्कृष्ट रहा
मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यापार की सुगमता मामले में झारखण्ड का प्रदर्शन हमेशा से उत्कृष्ट रहा है. व्यापार सुधार कार्य योजना के शुरुआती 5 संस्करणों में झारखण्ड हमेशा शीर्ष 10 राज्यों की सूची में रहा है.
रिडक्शन ऑफ कम्प्लायंसेज बर्डेन कार्यक्रम के अन्तर्गत महत्वपूर्ण पहल की गई है. जिसमें बिशेष प्रक्रियाओं को सरल एवं युक्तिसंगत बनाना है. विगत दो बर्षों यथा 2021 और 2022 में व्यवसायों के साथ साथ नागरिक सेवाओं से संबंधित कुल 507 कम्प्लायंसेज को कम किया गया है तथा डिक्रिमिनलाइजेशन की दिशा में भी सरकार काम कर रही है.
जिसका उद्देश्य छोटे उल्लंघनों पर सजा के स्थान पर वित्तीय दंड का प्रावधान करना है. ताकि व्यवसायियों और नागरिकों में भय का वातावरण समाप्त हो सके.
इस क्रम में राज्य के श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग के द्वारा एक धारा को कम कर दिया है और 8 धाराओं को गैर अपराधीकरण के लिए प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है. इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा झारखण्ड में राष्ट्रीय उच्च पथ के घनत्व को राष्ट्रीय औसत के बराबर लाने के लिए 1662.50 किलोमीटर के कुल 8 प्रमुख सड़क कॉरिडोर को भी चिन्हित किया गया है.
इन राजकीय पथों को राष्ट्रीय उच्च पथों में विकसित किये जाने से राज्य में उत्तर से दक्षिण एवं पूरब से पश्चिम तक कनेक्टिविटी सुदृढ़ होगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके अलावा होली टूरिस्ट कॉरिडोर एवं सेंट्रल कॉरिडोर को चिन्हित करके डीपीआर तैयार किया जा रहा है तथा उन्होंने उक्त महत्वपूर्ण परियोजनाओं के कार्यान्वयन के लिए केन्द्र से सहयोग का आग्रह किया है.
वहीं मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखण्ड में नागरीय क्षेत्रों एवं आबादी का निरंतर विकास हो रहा है और इसी के अनुरूप नागरीय अवसंरचनाओं एवं नागरिकों की मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए प्रयास किया जा रहा है.
इसके तहत् 10 शहरों का नगर विकास योजना एवं 6 शहरों का कॉम्प्रेहेन्सिव मॉबिलिटी प्लान तैयार कर लिया गया है. राज्य के कुल 43 शहरों का जीआईएस बेस्ड मास्टर प्लान भी तैयार कर लिया गया है. वर्तमान में 45 निकायों व 2 विकास प्राधिकार समेत रांची स्मार्ट सिटी कॉरपोरेशन में ऑनलाइन बिल्डिंग प्लान एप्रूवल मैनेजमेंट सिस्टम व लेआउट प्लान एप्रूवल मैनेजमेंट सिस्टम लागू है.

