
उदित वाणी जमशेदपुर: अनुशासन को नई दिशा देने की पहल के तहत Gulmohur High School में कक्षा अनुशासन एवं सकारात्मक व्यवहार प्रबंधन पर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का संचालन विद्यालय की प्राचार्या सुश्री प्रीति सिन्हा ने किया, जिसमें स्कूल के सभी 85 शिक्षकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।
यह कार्यशाला इसलिए भी महत्वपूर्ण रही क्योंकि हाल ही में सुश्री सिन्हा ने National Institute of Mental Health and Neurosciences (निम्हांस), बेंगलुरु से मानसिक स्वास्थ्य एवं व्यवहार प्रबंधन पर उन्नत प्रशिक्षण प्राप्त किया है। उन्होंने प्रशिक्षण से मिले शोध-आधारित ज्ञान को विद्यालय की आवश्यकताओं के अनुरूप व्यावहारिक रूप में प्रस्तुत किया।
बहु-स्तरीय मानसिक स्वास्थ्य मॉडल की शुरुआत
कार्यशाला का मुख्य आकर्षण विद्यालय में विकसित और लागू किया गया अनूठा बहु-स्तरीय मानसिक स्वास्थ्य एवं व्यवहार प्रबंधन मॉडल रहा। यह मॉडल दंड के बजाय रोकथाम, आत्मचिंतन और सुधार पर आधारित है।
मॉडल की प्रमुख विशेषताएं:
-
नर्सरी से कक्षा 12 तक अनिवार्य लाइफ स्किल्स शिक्षा: छात्रों में भावनात्मक संतुलन, सहानुभूति, निर्णय क्षमता और जिम्मेदार व्यवहार के विकास पर जोर।
-
‘हैप्पीनेस चेकलिस्ट’ पहल: छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के लिए आत्म-मूल्यांकन की व्यवस्था, जिससे घर-विद्यालय समन्वय मजबूत हो।
-
व्यवहार सुधार प्रपत्र: अनुचित व्यवहार पर दंड की जगह संरचित सुधार प्रक्रिया अपनाई जाती है।
-
काउंसलिंग रेफरल प्रणाली: गंभीर मामलों में परामर्शदाताओं एवं मनो-सामाजिक एम्बेसडरों के माध्यम से सहायता उपलब्ध।
पूरा मॉडल इस क्रम पर आधारित है — रोकथाम → आत्मचिंतन → सुधार → विशेषज्ञ सहयोग, न कि सीधे दंड।
शिक्षकों में बढ़ा आत्मविश्वास
कार्यशाला में शिक्षकों को यह समझाया गया कि अनुशासन का उद्देश्य बाहरी नियंत्रण नहीं, बल्कि छात्रों में आत्म-नियंत्रण विकसित करना है। सत्र के बाद शिक्षकों और काउंसलरों ने साझा किया कि वे अब सकारात्मक व्यवहार प्रबंधन की रणनीतियों से समस्याओं को अधिक प्रभावी ढंग से संभाल पा रहे हैं।
विशेष रूप से इन विषयों पर जोर दिया गया:
-
शिक्षक-छात्र संबंधों को सुदृढ़ करना
-
भावनात्मक नियंत्रण कौशल विकसित करना
-
दंड के स्थान पर संवाद और पुनर्स्थापनात्मक पद्धति अपनाना
-
उदाहरण प्रस्तुत करते हुए संतुलित व्यवहार दिखाना
-
छात्रों को विकल्प देकर जिम्मेदारी की भावना बढ़ाना
प्राचार्या सुश्री प्रीति सिन्हा ने कहा कि कोविड-19 के बाद बच्चों में बढ़ती चिंता और भावनात्मक असंतुलन को देखते हुए संवेदनशील एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना समय की आवश्यकता है।
यह कार्यशाला विद्यालय की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसके तहत शिक्षा को केवल शैक्षणिक उपलब्धियों तक सीमित न रखते हुए मानसिक स्वास्थ्य, जीवन कौशल और मानवीय मूल्यों से जोड़कर भावी पीढ़ी को आत्मविश्वासी और जिम्मेदार नागरिक बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किया जा रहा है।

