
उदित वाणी, जमशेदपुर: झारखंड सरकार द्वारा मादक पदार्थों के खिलाफ चलाए जा रहे राज्यव्यापी जागरूकता अभियान के अंतर्गत सांस्कृतिक कार्य निदेशालय, पर्यटन, कला, संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग के तत्वावधान में रांची स्थित ऑड्रे हाउस में एक भव्य नाट्य प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता में झारखंड के 30 से अधिक नाट्य दलों ने भाग लिया, जहां प्रत्येक दल ने अपने-अपने नाटकों के माध्यम से नशे के दुष्परिणामों और इससे बचाव का मार्मिक संदेश प्रस्तुत किया।
पूर्वी सिंहभूम से गीता थिएटर की दमदार प्रस्तुति
इस राज्यस्तरीय आयोजन में जमशेदपुर के गीता थिएटर ने अपने नाटक ‘नशा करें नाश’ की प्रस्तुति दी। इस नाटक का निर्देशन प्रेम दीक्षित और गीता कुमारी ने किया। नाटक ने एक निम्न-मध्यवर्गीय परिवार की कहानी के माध्यम से नशे की बर्बादी को अत्यंत संवेदनशील ढंग से दर्शाया।
क्या नशा सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, पूरे परिवार को तोड़ देता है?
नाटक की कथा में शुरुआत एक संपूर्ण और अनुशासित परिवार से होती है, जो दादा जी के मार्गदर्शन में प्रेमपूर्वक जीवन यापन करता है। परंतु जब परिवार का युवा सदस्य राजेश, पड़ोस के नशेड़ी के संपर्क में आता है, तो धीरे-धीरे पूरा परिवार विकृति, हिंसा और अपमान की ओर ढलने लगता है।
राजेश, जो पहले पत्नी को घर से बाहर नहीं निकलने देता था, अब उसे काम पर भेजकर पैसे लाने को मजबूर करता है। जब पत्नी पैसा नहीं ला पाती, तो वह उसे पीटता है और अंततः नेता से अवैध संबंध बनाने को बाध्य करता है। इन सभी घटनाओं से पत्नी शीला आत्महत्या कर लेती है।

दृश्य इतने सजीव कि दर्शक हुए भावुक
नाटक की प्रस्तुति इतनी भावनात्मक और प्रभावशाली थी कि पूरे सभागार में भावुकता का माहौल बन गया। निर्णायक मंडल ने नाटक की कला, संप्रेषण और भाव सम्प्रेषण की मुक्त कंठ से सराहना की, साथ ही कुछ दृश्य संयोजन की तकनीकी बारीकियों पर सुझाव भी दिए।
नाटक में नशेड़ी आदमी की भूमिका मानशा मूर्मू, शीला औरत की भूमिका गीता कुमारी, राजेश की भूमिका में मनीष पाठक,नशा के लिए पैसे देने वाला नेता की भूमिका प्रेम दीक्षित, दादा जी की भूमिका मोहम्मद उस्मान, बेटी की भूमिका में रितिका, बेटे की भूमिका में बाल कलाकार देवराज कुमार और उसके विद्यालय मित्र की भूमिका तुफैल रज़ा, बाजार में चैन छिनताई होने वाली महिला की भूमिका प्रभा तिवारी तो वहीं नाटक की सूत्रधार की भूमिका सुष्मिता सरकार ने निभाया।
अनुभव ने बढ़ाया आत्मविश्वास: गीता थिएटर
कार्यक्रम के बाद प्रेम दीक्षित ने मीडिया से कहा, “यह पहला अवसर था जब हमारी युवा टीम, 15 से अधिक कलाकारों के साथ, झारखंड सरकार के सांस्कृतिक मंत्रालय द्वारा आयोजित मंच पर पहुंची। यह अनुभव आगे आने वाले आयोजनों के लिए प्रेरणा और दिशा दोनों देगा।”
संरक्षक ताजदार आलम का सराहनीय सहयोग
गीता थिएटर की इस भागीदारी को सफल बनाने में सामाजिक संस्था सुंदरम् और उसके केन्द्रीय अध्यक्ष एवं गीता थिएटर के संरक्षक मोहम्मद ताजदार आलम का विशेष योगदान रहा, जिनके प्रयासों से यात्रा, आवास और भोजन की व्यवस्था संभव हो सकी।

