
उदितवाणी, रांची: राजभवन द्वारा जनजातीय परामर्शदातृ परिषद [टीएसी] की बैठक को असंवैधानिक बताया गया तथा राजभवन द्वारा झारखंड सरकार से मामले में जबाब तलब किया गया है.
राजभवन द्वारा टीएसी के गठन व नियमावली को असंवैधानिक बताने के बावजूद पिछले दिनों टीएसी की बैठक आयोजित की गई. इस बैठक को राजभवन ने गंभीरता से लिया है तथा राज्यपाल के प्रधान सचिव नितिन मदन कुलकर्णी ने मुख्य सचिव के माध्यम से राज्य सरकार से पूछा है कि राजभवन की आपत्तियों पर जवाब दिए बिना कैसे टीएसी की बैठक आयोजित की गई.
राज्य सरकार को लिखे गये पत्र में कहा गया है कि यह संविधान की पांचवीं अनुसूची के प्रावधानों के भी खिलाफ है. इस मामले में अब तक राज्य सरकार द्वारा कोई जवाब भी नहीं दिया गया है.
ज्ञात हो कि पूर्व राज्यपाल वर्तमान में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा टीएससी के गठन को लेकर दो-दो बार सूची लौटा दी गई थी. इसके बाद हेमंत सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ के तर्ज पर टीएसी के गठन को लेकर राज्यपाल की भूमिका को खत्म करते हुए टीएएसी गठन को लेकर नई नियमावली गठित कर दी गई तथा मुख्यमंत्री की स्वीकृति से ही टीएसी सदस्यों की नियुक्ति का प्रावधान किया गया.
राज्यपाल से नियमावली पर स्वीकृति भी नहीं ली गई. तब से राज्य सरकार व राजभवन के बीच टीएसी को लेकर विवाद चला आ रहा है. पूर्व राज्यपाल मुर्मू ने इस मामले में तत्कालीन राष्ट्रपति व केंद्रीय गृह मंत्रालय को भी इसकी जानकारी भेज दी थी. अब टीएसी की बैठक के बाद नये सिरे से फिर से विवाद बढ़ने के आसार दिखने लगा है. मामले में राजभवन के तेवर तल्ख है.
टीएसी के दो सदस्यों का मनोनयन चाहता है राजभवन
टीएसी के गठन में कम से कम दो सदस्यों का मनोनयन का अधिकार अनिवार्य रूप से राजभवन को देने का प्रावधान करना चाहता है तथा इसे लेकर राजभवन द्वारा हेमंत सरकार द्वारा टीएसी गठन को लेकर राजभवन द्वारा गत 4 फरवरी 2022 को ही पहली बार आपत्ति जतायी गई थी.
लेकिन नौ महीने बीतने के बाद भी सरकार की तरफ से राजभवन को इस मामले में कोई जवाब नहीं भेजा गया और सरकार ने राजभवन की नाराजगी को नजरअंदाज करते नौ माह बाद फिर से बैठक की गई.

