
उदित वाणी, जमशेदपुर: डीबीएमएस.कॉलेज ऑफ एजुकेशन में 13 मार्च 2026 को आईक्यूएसी की ओर से बी.एड. छात्रों के लिए एक प्रेरक सत्र का आयोजन किया गया. सत्र का संचालन चेन्नई से आए प्रसिद्ध प्रेरक वक्ता सी.के.वी. रमण ने किया. उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए शिक्षण पेशे के प्रति गहरा सम्मान व्यक्त किया और कहा कि शिक्षक समाज को दिशा देने और भावी पीढ़ियों का मार्गदर्शन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
शिक्षक की जिम्मेदारी पर दिया जोर
अपने संबोधन में वक्ता ने कहा कि शिक्षक का दायित्व केवल पाठ पढ़ाना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और विचारों को आकार देना भी है. उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज के निर्माण में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं और उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को निर्धारित करता है.

गुरु के वास्तविक अर्थ को समझाया
सत्र का उद्देश्य भावी शिक्षकों को केवल एक शिक्षक के रूप में नहीं, बल्कि बेहतर इंसान बनने के लिए प्रेरित करना था. वक्ता ने गुरु के वास्तविक अर्थ को बताते हुए कहा कि गुरु वह होता है जो अज्ञानता के अंधकार को दूर कर ज्ञान और आत्मज्ञान का मार्ग दिखाता है. उन्होंने कहा कि एक शिक्षक अपने विद्यार्थियों को जो सबसे बड़ा उपहार दे सकता है, वह है ज्ञान का अमूल्य और स्थायी खजाना, जो जीवन भर उनके साथ रहता है.
संस्कृत श्लोकों से बताया शिक्षा का महत्व
सी.के.वी. रमण ने शिक्षा और शिक्षक के महत्व को समझाने के लिए कई संस्कृत श्लोकों का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि विद्या ऐसा धन है जिसे न चोर चुरा सकता है, न राजा छीन सकता है और न ही भाई उसका बंटवारा कर सकता है. यह ऐसा धन है जो समय के साथ निरंतर बढ़ता रहता है. उन्होंने भगवद्गीता के चौथे अध्याय के श्लोक 38 का उल्लेख करते हुए बताया कि ज्ञान की तुलना किसी राज्य से नहीं की जा सकती. राजा की पूजा केवल अपने राज्य में होती है, जबकि विद्वान सर्वत्र सम्मानित होते हैं.
चाणक्य नीति और यक्ष-युधिष्ठिर संवाद का उल्लेख
वक्ता ने चाणक्य नीति और यक्ष-युधिष्ठिर संवाद के माध्यम से शिक्षा और शिक्षार्थी के महत्व को विस्तार से समझाया. इस दौरान उन्होंने छात्रों के प्रश्नों का भी उत्तर दिया और उन्हें जिम्मेदार, संवेदनशील और प्रभावी शिक्षक बनने के लिए प्रेरित किया.
कार्यक्रम में रहे कई गणमान्य उपस्थित
सत्र ने छात्रों पर गहरा प्रभाव छोड़ा और उन्हें शिक्षा के महत्व, शिक्षण पेशे की गरिमा तथा निरंतर सीखने के मूल्य की गहरी समझ मिली. इस अवसर पर कॉलेज की संरक्षिका भानुमती नीलकंठन, अध्यक्ष डॉ. बी. चंद्रशेखर, सचिव श्रीप्रिया धर्मराजन, सह-सचिव सुधा दिलीप, प्राचार्या डॉ. जूही समर्पिता, उप-प्राचार्या डॉ. मोनिका उप्पल सहित सभी शिक्षकगण और कर्मचारी उपस्थित थे.
DBMS College of Education, डीबीएमएस कॉलेज ऑफ एजुकेशन, motivational session for B.Ed students, बीएड छात्रों के लिए प्रेरक सत्र

