
उदितवाणी, रांची: कांग्रेस पार्टी द्वारा भी रामगढ़ उपचुनाव के लिए प्रत्याशी की घोषणा कर दी गई. एआईसीसी द्वारा पूर्व विधायक ममता देवी के पति बजरंग महतो के नाम पर ही मुहर लगाई.
बजरंग महतो राज्य में सत्तारूढ़ घटक दलों के साझा प्रत्याशी होंगे तथा बजरंग उपचुनाव के लिए नामांकन भरने के आखिरी दिन 7 फरवरी को अपना परचा दाखिल करेंगे. इस अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस के झारखंड प्रभारी अविनाश पांडेय समेत कांग्रेस व झामुमों के अन्य बड़े नेता शामिल रहेंगे.
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश ठाकुर एवं पार्टी विधायक दल के नेता आलमगीर आलम ने शनिवार को संवाददाता सम्मेलन में मीडिया को इसकी जानकारी दी.
उधर बजरंग को प्रत्याशी बनाये जाने की घोषणा के बाद रामगढ़ विधानसभा क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोगों ने खुशी जतायी और बजरंग महतो को बधाई दी. गोला से रामगढ़ जाने के क्रम में जगह-जगह लोगों ने रोक कर उनका स्वागत किया. वहीं चितरपुर में झामुमो के वरिष्ठ नेताओं ने बजरंग महतो को रोककर उनको प्रत्याशी बनाए जाने पर बधाई दी.
ज्ञात हो कि ममता देवी की विधानसभा की सदस्यता रद्य होने के बाद रामगढ़ में उपचुनाव हो रहा है.
सुनीता चैधरी ने दाखिल की परचा, आजसू-भाजपा के बड़े नेता थे मौजूद
इधर एनडीए प्रत्याशी के रूप में आजसू पार्टी की सुनीता चौधरी ने शनिवार को अपना परचा दाखिल की. इस अवसर पर आजसू प्रमुख सुदेश कुमार महतो, सुनीता चैधरी के पति सांसद चन्द्रप्रकाश चैधरी, भाजपा के रांची के वरिष्ठ विधायक चन्द्रेश्वर प्रसाद सिंह, मांडू के विधायक जयप्रकाश भाई पटेल व कांके के विधायक समरीलाल, आजसू के प्रधान महासचिव रामचंद्र सहिस, गोमिया विधायक सह आजसू महासचिव डॉक्टर लंबोदर महतो समेत आजसू व भाजपा के कई नेता और पदाधिकारी उपस्थित थे.
पार्टी उम्मीदवार श्रीमती सुनीता चौधरी के नामांकन दाखिल करने के बाद आजसू के केंद्रीय अध्यक्ष सुदेश कुमार महतो समेत भाजपा नेताओं ने कहा कि रामगढ़ उपचुनाव से झारखंड में राजनीति की नई शुरुआत होने जा रही है. इस उपचुनाव में जीत के साथ एनडीए सशक्त उपस्थिति दर्ज करायेगा.
उन्होंने कहा कि रामगढ़ की जनता वस्तुस्थिति को समझ चुकी है कि यहां का विकास किसके जरिए हो सकता है. हेमंत सरकार की लूट और झूठ का जवाब रामगढ़ की जनता इस उपचुनाव में देने जा रही है.
तीन सालों में झामुमो और कांग्रेस ने जनादेश का अपमान किया है और लोगों को छला है. सरकार की असंवैधानिक नीतियों के कारण झारखंड के विकास पर प्रतिकूल असर पड़ा है. रामगढ़ उपचुनाव महज विधानसभा क्षेत्र तक सीमित नहीं है। बल्कि यह चुनाव सरकार की वादाखिलाफी, भ्रष्टाचार तथा हर स्तर पर व्याप्त लूट के खिलाफ है.


