
उदित वाणी, जमशेदपुर: जमशेदपुर के युवाओं का पूरा दुनिया लोहा मानता है. लोहे के शहर में कई ऐसी युवा प्रतिभाओं को देश दुनिया के शिखर तक पहुंचाया है, जिन्होंने अपनी जिद और जद्दोजहद की बदौलत सफलता हासिल की है.
आइए आज ऐसे ही कुछ युवाओं से रूबरू होते हैं. खेल कला और संस्कृति के लिए जाने जाने वाले इस शहर में साहित्य को भी युवाओं ने नई ऊंचाई दी है. साहित्य अकादमी नई दिल्ली भी यहां के युवाओं का लोहा मानता है. यही कारण है कि एक नहीं दो नहीं बल्कि कई युवा साहित्यकारों ने साहित्य अकादमी अवार्ड पाकर इस शहर का गौरव बढ़ाया है.
परसुडीह की बेटी सालगे हांसदा ने जीता युवा सहित अकादमी अवार्ड
ताजा युवा साहित्य अकादमी अवार्ड की बात करें तो परसुडीह निवासी सालगे हांसदा को 2022 में युवा साहित्य अकादमी अवार्ड मिला. संताली उपन्यास जानाम दिशोम उजाड़ोक काना (जन्म भूमि वीरान हो रही है) के लिए सालगे हांसदा को यह पुरस्कार मिला.

सालगे घाटशिला कॉलेज में पढ़ती हैं. बागोड़ा निवासी स्वर्गीय गालुराम हांसदा और माता सीता हांसदा के घर (एक बेटे व चार बेटियों) सबसे छोटी बेटी के रूप में 23 अक्टूबर 1989 को सालगे हांसदा ने जन्म लिया. सालगे ने आरंभिक शिक्षा बारीगोड़ा सामुदायिक स्कूल से ली है. सिर्फ सालगे ही नहीं इसके अलावा भी कई युवाओं ने साहित्य अकादमी अवार्ड पाकर शहर का नाम रोशन किया है.
रानी मुर्मू ने भी संताली साहित्य अकादमी अवार्ड जीता
साहित्य अकादमी अवार्ड (2018) पाने वालों में जमशेदपुर की संताली साहित्यकार रानी मुर्मू का भी नाम शामिल है. संताली का साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार संताली साहित्यकार जमशेदपुर के देवघर (बीरडीह) की रहनेवाली रानी मुर्मू को वर्ष 2018 में दिया गया है.

रानी मुर्मू को यह पुरस्कार उनकी संताली कहानी संग्रह होपोन मइया: कुकमू’ (छोटी बहन का सपना ) के लिए दिया गया है. साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार जीतनेवाली रानी मुर्मू संताली साहित्यकार होने के साथ-साथ पेशे से आरवीएस कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी जमशेदपुर में ट्रेनिंग एवं प्लेसमेंट सेल में सपोर्टर के रूप में काम करती हैं.
रानी ने वर्ष 2011 में रांची यूनिवर्सिटी से राजनीति शास्त्र से बीए पास किया. उनके पिता बुधराय मुर्मू वर्ष 2010 में स्वर्णरेखा प्रोजेक्ट से रिटायर्ड हुए हैं.
श्याम ने संताली भाषा को बच्चों और युवाओं के बीच बनाया लोकप्रिय
वर्ष 2012 में साहित्य अकादमी अवार्ड से सम्मानित जमशेदपुर के युवा श्याम सी टुडू ने भी शहर का नाम रोशन किया. श्याम संताली साहित्य के विश्वकोश, युवा लेखक, कवि, संपादक, अध्यापक और प्रकाशक श्री श्याम सी टुडू हैं.
सरकारी कागज़ात के अनुसार टुडू का जन्म 3 अप्रैल 1983 को अपने नानीहाल केंदाडीह (बुरसा घुटु) में हुआ था, हालांकि वह दाबांकी, पोटका के स्थायी निवासी हैं. पिता का नाम कोंदा टुडू और मां का नाम सागेन टुडू है. उन्होंने संताली वर्णमाला के प्रचार-प्रसार और लोगों को सिखाने के उद्देश्य से ऑल चिकि लर्निंग पुस्तक की रचना की, जो 2003 में पहली बार प्रकाशित हुई थी.

गैर संथालों को संताली सिखाने के उद्देश्य से उन्होंने “संताली भाषा शिक्षा” नामक पुस्तक की रचना 2004 में की थी. यह पुस्तक गैर-संथालों में काफी लोकप्रिय और चर्चित रही.
2010 में ही उनकी काफी अरसे के बाद एक कविता संग्रह प्रकाशित हुई, जिसका शीर्षक था “जाला दाग”. यह कविता संग्रह संताली साहित्य की दुनिया में काफी चर्चित रही. कवि को इसी कविता संग्रह के लिए ही 2012 की साहित्य अकादमी के युवा पुरस्कार से सम्मानित किया गया. यह पुस्तक का हिंदी अनुवाद रवीना प्रकाशन, दिल्ली से प्रकाशनाधीन है.
गुगल सर्च में भारत के चर्चीत लेखकों की सूची में जमशेदपुर के युवा
जमशेदपुर स्थित गोलमुरी निवासी अंशुमन भगत लौहनगरी के ऐसे एक हीरे है जिसने अपने लेखनी के दम पर अपना मुकाम पहले तो राज्य स्तर पर बनाया और अब इसी नायाब लेखक ने अपने प्रतिभा के बल पर अपना नाम सुनहरे अक्षर में भारत के प्रसिद्ध लेखकों के श्रेणी में अंकित करवा लिया है.
गुगल सर्च में भारत के चर्चीत लेखकों की सूची में उनका भी नाम शामिल है. उनका नाम भारतीय प्रसिद्ध लेखकों की सूची में भी दर्ज हो गया है और यह हमारे जमशेदपुर तथा पूरे झारखंड वासियों लिए गर्व की बात है.
यह पहली बार नहीं है इससे पहले भी अंशुमन भगत का नाम झारखंड के प्रसिद्ध लेखकों की श्रेणी में जुड़ चुका था. किंतु अब जमशेदपुर के चर्चित लेखक अंशुमन भगत का नाम भारतीय लेखकों की श्रेणी में भी शामिल हो चुका है. अब तक जमशेदपुर के युवा लेखक अंशुमन को उनके लेखनी से काफी ज्यादा लोकप्रियता मिल चुकी है.
अंशुमन ने अपने निरंतर प्रयास और लेखन शैली को ध्यान में रखते हुए खुद को इस काबिल बनाया कि उनका नाम हमेशा चर्चा में बना रहता है.


