
उदित वाणी, जमशेदपुरः बोधि सोसाइटी के सभी उपासकों और सदस्यों के सहयोग से बुद्ध विहार प्रांगण में आज से वर्षावास का कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है. इस बार तीन बौद्ध भिक्षु बिसुदानंद, भिक्षु ज्ञान बोधि और भिक्षु नंदाप्रिया के मार्गदर्शन में वर्षावास का कार्यक्रम संचालित होगा. सोसाइटी ने तीनों पूजनीय भिक्खुओं को श्रद्धपूर्वक चीवर (वस्त्र) दान कर वर्षावास के लिए निमंत्रित किया है. आज ही के दिन बोधि सोसाइटी ने भारतीय संघराज भिक्खू महासभा के 5वे संघराज बुद्धगया और बोधि सोसाइटी के पूर्व विहार अध्यक्ष डॉ के संघरक्षित महाथेरो को श्रद्धाजंलि दी गई. उनका परिनिर्वाण 4 जुलाई को कोलकाता में हुआ था.
तीन मास का होता है वर्षावास
वर्षावास का कार्यक्रम तीन मास का होता है. यह आषाढ़ पूर्णिमा (गुरु पूर्णिमा) से शुरू होकर पवर्णी पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा) तक चलता है. इस दिन को पूरे विश्व में बौद्ध समुदाय धम्मचक्कपवत्तन सुत्त (पाली- धम्मकक्कप्पवत्तन सुत्त) दिवस के रूप में याद करता है. इस दिन भगवान गौतम बुद्ध ने पांच शिष्यों को धर्म का दान देकर धम्म का प्रचार प्रसार किया था, इसलिए इस पूर्णिमा के दिन को गुरु पूर्णिमा कहा जाता है. वर्षावाद के दिनों में सभी भंते एक ही जगह रहकर लोगों को धम्म शिक्षा देते हैं और लोगों को साधना ध्यान का अभ्यास कराते हैं. इस दौरान कुछ उपासक व बच्चे श्रामनेर (श्रवण) भी बनते हैं, जो बुद्ध विहार में रहकर धार्मिक शिक्षा ग्रहण करते हैं.
पंचशील का पालन करते हैं उपासक
वर्षावास में प्रत्येक उपासक-उपासिका को पंचशीलों का पालन करना पड़ता है. कुछ उपासक उपासिका बौद्ध विहार के साप्ताहिक कार्यक्रमों में अष्टशीलों का भी पालन करते हैं. प्रथम अष्टशीलों के दिन सोसाइटी के तरफ से सभी उपासक उपसिकाओं को भोजन दान दिया गया.
आषाढ़ी पूर्णिमा के दिन पूरा होगा वर्षावास
तीन मास तक चलने वाला वर्षावास आषाढ़ी पूर्णिमा के दिन पूरा होता है. यह दिन बुद्धिस्ट समुदाय के लिये विशेष होता है. वर्षावास के अंतिम दिन पावर्णी (प्रवणा) पूर्णिमा में बुद्धिस्ट समुदाय बुद्ध विहार व अपने घरों में दीप प्रज्जवलित कर अपनी खुशियों का इजहार करते हैं.

