
विश्व में सिंगल यूज प्लास्टिक का करता सर्वाधिक उपयोग
उदित वाणी, जमशेदपुर: संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएसए) विश्व में सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग करने वाला सबसे बड़ा देश है. वहां की सरकार ने 2032 तक चरणबद्ध तरीके से सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है. अमेरिकी के आंतरिक विभाग ने बुधवार को कहा कि प्लास्टिक प्रदूषण में एक प्रमुख योगदानकर्ता को कम करने के प्रयास में 2032 तक राष्ट्रीय उद्यानों और अन्य सार्वजनिक भूमि में एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक उत्पादों की बिक्री को समाप्त कर देगा. आंतरिक सचिव डेव हालेड ने 480 मिलियन एकड़ से अधिक सार्वजनिक भूमि पर ऐसे उत्पादों और पैकेजिंग की खरीद, बिक्री और वितरण को कम करने और खाद या बायोडिग्रेडेबल सामग्री जैसे अधिक टिकाऊ विकल्पों की पहचान करने का आदेश जारी किया.
अमेरिका में रीसाइक्लिंग दर में आई गिरावट
अमेरिका प्लास्टिक कचरे का दुनिया के सबसे बड़े उत्पादकों में से एक है. पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वाली संस्था लास्ट बीच क्लीन अप एंड बियॉन्ड प्लास्टिक्स की एक रिपोर्ट के अनुमानों के अनुसार, अमेरिका में रिसाइक्लिंग दर पिछले साल 5 प्रतिशत से 6 प्रतिशत के बीच गिर गई, क्योंकि कुछ देशों ने यूएसए से अपशिष्ट निर्यात लेना बंद कर दिया और अपशिष्ट स्तर नई ऊंचाई पर पहुंच गया. आंतरिक विभाग ने कहा कि उसने वित्तीय वर्ष 2020 में लगभग 80,000 टन नगरपालिका ठोस अपशिष्ट का उत्पादन किया.
भारत सरकार भी कचरा प्रबंधन को विकसित करे तो होगा फायदा
भारत सरकार भी अपने यहां कचरा प्रबंधन को विकसित करे और रिसाइक्लिंग दर को बढ़ाए तो देश को तो फायदा होगा ही सिंगल यूज प्लास्टिक उत्पादनकर्ताओं को भी बायोडिग्रेबल उत्पाद को बनाने का समय मिल जाएगा. झारखंड डिस्पोजल एंड पैकेजिंग मैटेरियल एसोसिएशन ने झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता से मिलकर अपनी समस्या को उनके समक्ष रखा और एसोसिएशन के सुझाव को भारत सरकार तक पहुंचाने का अनुरोध किया.
सिंगल यूज प्लास्टिक को पुन: परिभाषित करने की आवश्यकता : अमित अग्रवाल
जमशेदपुर प्लास्टिक निर्माता एवं विक्रेता संघ के अमित अग्रवाल कहते हैं कि सरकार को एक बार फिर से सिंग्ल यूज प्लास्टिक को परिभाषित करने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि वर्तमान में सरकार ने जिन उत्पादों को सिंगल यूज प्लास्टिक की श्रेणी में रखा है उन उत्पादों का आसानी से रिसाइक्लिंग संभव है. अगर सरकार रिसाइक्लिंग प्रोसेस को सुदृढ़ कर ले तो इस इंडस्ट्री को बचाया जा सकता है. साथ ही इंडस्ट्री को अपने को अपग्रेड करने के लिए थोड़ा समय तो आसानी से मिल सकता है.


