
उदित वाणी, जमशेदपुर: शिक्षकों का अपडेट होते रहना हमेशा आवश्यक होता है. इसी आवश्यकता की पूर्ति करने के लिए डीएवी बिष्टूपुर में दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया.
इसमें डीएवी झारखंड जोन-बी के 300 शिक्षकों ने हिस्सा लिया. इन शिक्षकों को शिक्षा की नई विधा को लेकर अपडेट किया गया. बैठक में डीएवी बिष्टूपुर की प्रिंसिपल प्रज्ञा सिंह ने सबका स्वागत किया. डीएवी के क्षमता संवर्द्धन कार्यशाला में अतिथि के रूप में जोन बी के सभी विद्यालयों के प्राचार्य शामिल हुए.
इनमें एमके सिन्हा (सहायक क्षेत्रीय अधिकारी, हेहल), आरके साहू (गुमला), बीपी रॉय (खलारी), राकेश शर्मा (सिमडेगा), तन्मा य बनर्जी (बुंडू), एके मिश्रा (सिल्ली), राकेश कुमार (भवनाथपुर), एके चौबे (गढ़वा), बी घोष (गोविंदपुर), टीपी झा (खूंटी) तथा डीएवी बिष्टूपुर की प्राचार्या प्रज्ञा सिंह शामिल हुईं.
उद्घाटन समारोह की शुरुआत परंपरानुसार झारखंड ज़ोन बी के सहायक क्षेत्रीय अधिकारी एमके सिन्हा सहित सभी विद्यालयों के प्राचार्यों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर एवं डीएवी गान गाकर की गई.
इस अवसर पर विद्यालय की प्राचार्या प्रज्ञा सिंह ने सभी का स्वागत करते हुआ कहा कि शिक्षण की नई विधाओं की जानकारी सभी से साझा करके विद्यार्थियों को लाभान्वित करना ही इन कार्यशालाओं का लक्ष्य है. उन्होंने हमारे देश के महापुरुषों स्वामी दयानंद सरस्वती और स्वामी विवेकानंद के दूरदर्शितापूर्ण विचारों को समसामयिक बताया.
उन्होंने ट्रेनिंग की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि हम सभी हमेशा एक शिक्षार्थी हैं और हमें सदा वर्तमान और भविष्य की आवश्यकताओं को देखकर सीखने के लिए तत्पर रहना चाहिए.
झारखंड जोन बी के सहायक क्षेत्रीय अधिकारी एमके सिन्हा ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा का मुख्य उद्देश्य देश के युवा मस्तिष्क को प्रशिक्षित करना होता है. जिसकी ज़िम्मेदारी समाज में शिक्षकों के कंधों पर है. इसलिए समय-समय पर ऐसी कार्यशालाओं का आयोजन डीएवी विद्यालयों द्वारा किया जाता है.
उन्होंने उम्मीद जताई कि सभी शिक्षक इससे लाभान्वित होंगे और अपने कक्षाकक्ष में इनका प्रयोग करेंगे. इस कार्यशाला में डीएवी झारखंड जोन-बी के सभी विद्यालयों के 300 शिक्षकों ने भाग लिया.
इसमें भौतिकी, रसायन और जीवविज्ञान, अंग्रेजी, गणित, अर्थशास्त्र, कंप्यूटर, वाणिज्य, संगीत, कला, शारीरिक शिक्षा और मानविकी विषय शामिल हैं. इन दो दिनों में सभी विषयों के विषय संसाधकों द्वारा विषय को कक्षाकक्ष में अपने छात्रों तक प्रभावशाली ढंग से प्रेषित करने के गुर साझा किए गए.

