
उदित वाणी, जमशेदपुर : शहर में लगातार हो रही बारिश के कारण पुराने और जर्जर मकानों की स्थिति दिन-ब-दिन खतरनाक होती जा रही है। शनिवार की सुबह निर्मल नगर (ह्यूम पाइप बस्ती) में एक बड़ा हादसा उस समय घटित हो गया जब एक कच्चा मकान अचानक भरभराकर गिर पड़ा। हादसे के समय परिवार के तीन सदस्य मकान के भीतर सो रहे थे, जो मलबे में दबकर गंभीर रूप से घायल हो गए।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, हादसे में 82 वर्षीय वृद्धा रेणुका दास, उनके बड़े बेटे विनोद दास (47 वर्ष) तथा छोटे बेटे पविर दास (40 वर्ष) घायल हो गए। तीनों को स्थानीय लोगों की मदद से मलबे से बाहर निकाल कर तत्काल एक टेंपो के जरिए एमजीएम अस्पताल भेजा गया, जहां उनका इलाज जारी है। अस्पताल सूत्रों के अनुसार वृद्धा रेणुका दास की स्थिति गंभीर बनी हुई है। उनके हाथ और पैर में कई जगह फ्रैक्चर है, जबकि दोनों बेटों को आंतरिक चोटें आई हैं।

सुबह लगभग 5:15 बजे जब मोहल्ले में अधिकतर लोग नींद में थे, तभी जोर की आवाज के साथ मकान ढह गया। मलबे में दबे परिवार की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग घटनास्थल पर दौड़ पड़े और हाथों से मलबा हटाकर राहत कार्य शुरू किया। स्थानीय युवकों ने तत्परता दिखाते हुए तीनों घायलों को बाहर निकाला और बिना देरी किए टेंपो से अस्पताल भेजा।
रेणुका दास के चचेरे भाई उज्ज्वल दास ने बताया कि यह मकान पिछले कई वर्षों से जर्जर हालत में था। मिट्टी और खपड़े से बना यह मकान वर्षों पुराना है, जिसकी दीवारें लगातार बारिश से कमजोर हो चुकी थीं। मकान का ढांचा बांस और रोला से टिका हुआ था, जो सड़ चुका था। स्थानीय प्रशासन को कई बार सूचना देने के बाद भी कोई मदद नहीं मिली, न ही मकान को पक्का कराने का कोई प्रयास हुआ।
“बुजुर्ग रेणुका दास को आज तक वृद्धा पेंशन तक नहीं मिली है। दोनों बेटे दिनभर दिहाड़ी मजदूरी करते हैं और किसी तरह मां का पालन-पोषण करते हैं।” — उज्ज्वल दास, चचेरा भाई
निर्मल नगर ह्यूम पाइप बस्ती जैसे कई अन्य बस्तियों में भी अधिकांश मकान मिट्टी, बांस और खपड़े से बने हुए हैं। लगातार हो रही बारिश से इनकी दीवारें कमजोर हो रही हैं, जिससे कभी भी ऐसा हादसा दोहराया जा सकता है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि नगर निगम एवं जिला प्रशासन तत्काल सर्वे कर ऐसे मकानों में रहने वालों को अस्थायी राहत शिविर या वैकल्पिक सुरक्षित आवास उपलब्ध कराए।
हादसे के कई घंटे बाद भी प्रशासन का कोई प्रतिनिधि घटनास्थल पर नहीं पहुंचा था। स्थानीय पार्षद या निगम कर्मियों की भी उपस्थिति नहीं दिखी। इससे लोगों में आक्रोश है। पीड़ित परिवार को तत्काल सहायता देने की मांग की जा रही है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि आपदा प्रबंधन के नाम पर सिर्फ कागजी तैयारियां होती हैं, जमीन पर कोई क्रियान्वयन नहीं दिखता।
एमजीएम अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार वृद्धा रेणुका दास को मल्टीपल फ्रैक्चर है और उनकी स्थिति चिंताजनक है। अभी उन्हें विशेष निगरानी में रखा गया है। दोनों बेटों की हालत फिलहाल स्थिर है लेकिन उन्हें भी अस्पताल में ही रखा गया है।
निर्मल नगर की यह घटना सिर्फ एक पारिवारिक त्रासदी नहीं, बल्कि सरकारी उपेक्षा और सामाजिक असंवेदनशीलता का आईना है। जहां एक ओर “सबका साथ, सबका विकास” की बातें होती हैं, वहीं दूसरी ओर शहर के बीचों-बीच लोग खपड़े और बांस की छतों के नीचे मौत का इंतजार कर रहे हैं। यदि अब भी प्रशासन जागता नहीं, तो आने वाले दिनों में ऐसी खबरें आम होंगी।

