
उदितवाणी, रांची: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शुक्रवार को हजारीबाग प्रमंडल में मनरेगा योजना अंतर्गत कूप निर्माण में सरकारी राशि का दुरूपयोग करने के 10 आरोपियों के विरूद्ध एसीबी जांच का आदेश दिया है.
मुुख्यमंत्री ने एसीबी को विभागीय संकल्प संख्या 1623 दिनांक 07.08.2015 की कंडिका 22 के प्रावधान एवं पीसी एक्ट की धारा 17ए [1] [बी] में वर्णित प्रावधान के अनुसार प्राथमिकी दर्ज करके अनुसंधान करने की अनुमति दी है. नल कूप का निर्माण किए बिना राशि निकासी का आरोप बताया गया है कि जांचकर्त्ता द्वारा जाँचोपरान्त उल्लेख किया गया है कि चतरा निवासी बसंत सिंह एवं नरेश सिंह के नाम से दो कूप निर्माण की योजना थी.
परन्तु एक ही कूप का निर्माण किया गया और दोनों कूप की राशि की निकासी करके सरकारी राशि का गबन किया गया है. नरेश सिंह के नाम से कूप निर्माण के नाम पर मुखिया, पंचायत सेवक एवं कनीय अभियंता द्वारा मिलीभगत करके 58280 रूपये की सरकारी राशि की निकासी किया गया है.
इसके अलावा उक्त योजनाओं की जांच से स्पष्ट हुआ है कि स्थल पर बिना काम कराये ही कुल 2,65,299 रूपये सरकारी राशि का निकासी करके बन्दरबांट किया गया है.
गबन करनेवालों में लाभुक प्रेमचन्द्र पाण्डेयए, रोजगार सेवक विशुन उराँव, नरेश हजाम, पंचायत सेवक नरेश हजाम व विवेक कुमार, मुखिया संजु देवी सामग्री आपूर्तिकर्ता मिथिलेश सिंह उर्फ राकेश सिंह [वर्तमान में सीमा पंचायत चतरा में मुखिया], कनीय अभियंता केदार सिंह व राजेश कुमार, सहायक अभियंता तारणी मंडल के संजय सिंह समेत एनआरईपी के कार्यपालक अभियंता एवं अन्य के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज करने का साक्ष्य पाया गया है.

