
उदित वाणी नई दिल्ली: मार्च 2026 की शुरुआत भगवान शिव को समर्पित रवि प्रदोष व्रत से हो रही है। मान्यता है कि प्रदोष व्रत रखने से व्यक्ति को पूर्व जन्म और वर्तमान के पापों से मुक्ति मिलती है तथा भगवान भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त होती है। महीने में दो बार आने वाला प्रदोष व्रत शिव भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
तिथि और शुभ मुहूर्त
1 मार्च, रविवार को त्रयोदशी तिथि शाम 7 बजकर 09 मिनट तक रहेगी, इसके बाद चतुर्दशी तिथि प्रारंभ हो जाएगी। यह दिन भद्रा से मुक्त है, इसलिए शुभ कार्यों की शुरुआत अच्छे मुहूर्त में की जा सकती है।
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अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:11 बजे से 12:58 बजे तक
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गोधूलि मुहूर्त: शाम 6:19 बजे से 6:44 बजे तक
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अमृत काल: सुबह 6:18 बजे से 2 मार्च सुबह 7:51 बजे तक
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ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 5:08 बजे से 5:57 बजे तक
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विजय मुहूर्त: सुबह 5:33 बजे से 6:47 बजे तक
रविवार को रवि पुष्य योग भी बन रहा है, जिसका समय सुबह 6:47 बजे से 8:34 बजे तक रहेगा। हालांकि इस दिन आडल योग नहीं रहेगा।
अशुभ मुहूर्त और राहुकाल
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राहुकाल: शाम 4:55 बजे से 6:22 बजे तक
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गुलिक काल: दोपहर 3:28 बजे से 4:55 बजे तक
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यमगण्ड काल: दोपहर 12:34 बजे से 2:01 बजे तक
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दुर्मुहूर्त: शाम 4:49 बजे से 5:25 बजे तक
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वर्ज्य मुहूर्त: रात 8:59 बजे से 10:32 बजे तक
सूर्योदय और दिशाशूल
1 मार्च को सूर्योदय सुबह 6:47 बजे और सूर्यास्त शाम 6:22 बजे होगा। चंद्रमा का उदय शाम 4:17 बजे होगा और वह अगले दिन सुबह 6 बजे तक रहेगा।
रविवार के दिन दिशाशूल पश्चिम दिशा में रहेगा, इसलिए इस दिशा में यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा और व्रत रखने से जीवन में सुख-समृद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
— आईएएनएस

